Tuesday, 3 March 2020

जाने वाले हो सके तो लौट कर आना ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

  जाने वाले हो सके तो लौट कर आना ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया 

जनाब आली हज़ूर आपको कोई रोक नहीं सकता है। अपने ठान लिया जो भी कर के रहते हैं। सबको समझ आ गया है। आपको आपकी पत्नी नहीं रोक सकी थी और किसी का शासन आप पर क्या चलेगा। जाना है ख़ुशी से जाओ और भी ग़म हैं ज़माने में सोशल मीडिया ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम व्हाट्सएप्प के सिवा। आपको जितना फायदा मिलना था मिल गया अब लगता है शायद नुकसान होता दिखाई दिया होगा। फिर भी बड़ी चहल पहल रौनक थी जाने कितने लोग तो आपने ही रख छोड़े थे गुणगान को उनको ये कमी खलनी लाज़मी है जब आप नहीं रहोगे सोशल मीडिया पर देखने को तब उनको कुछ भी पोस्ट करना किसी काम का नहीं लगेगा। अब अपने अपने दल या पद छोड़ने की बात कही होती तो चाटुकार लोगों को अवसर मिलता आपके समर्थन में भीड़ लेकर नारे लगाकर अपने नंबर बढ़ाने को। आपके दल के शासन वाले राज्यों से लोग आते आपको मनाने मगर जिनका ऐसा ख्वाब है कभी नहीं सच होने वाला। भला कुर्सी से कोई नेता कभी तंग आता है वास्तव में तो आपका ही करिश्मा है जो बड़े पद पर रहते इतना सोशल मीडिया पर रह सकते हैं। 

साफ बात तो ये है कि मुझे भी और तमाम लोगों को ये व्यर्थ की ऊर्जा और वक़्त की बर्बादी के इलावा कुछ भी नहीं है। मगर ये ऐसा नामुराद रोग है जिसका कोई उपचार नहीं आशिक़ी की तरह दर्द बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों दवा की। आपको इस से छुटकारा मिले तो लोग दोबारा कहेंगे आप हैं तो सब मुमकिन है। फिर भी मुझ जैसे जो आपके अथवा किसी के भी समर्थक या चाहने वाले नहीं हैं चाहेंगे आपके दर्शन सोशल मीडिया पर होते रहें तो खूब चर्चा को विषय उपलब्ध होते रहें। सत्ता का विरोध करने वाले लोगों को ऐसे आपका छोड़ कर जाना जैसे कुछ खालीपन दे जाएगा। ये मत समझना वास्तव में ऐसा करने से किसी को कोई फर्क पड़ेगा कुछ भी नहीं अंतर होता कोई रहता है या छोड़ जाता है बेचैनी उसी को होती है जो छोड़ता है मगर चैन नहीं आता जिस की आदत थी उसके बगैर।


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