Thursday, 28 June 2018

खामोश रहना नहीं आसां , पर कुछ भी कहना नहीं आसां - लोक सेतिया "तनहा"

     खामोश रहना नहीं आसां , पर कुछ भी कहना नहीं आसां 

                        - लोक सेतिया "तनहा" 

खामोश रहना नहीं आसां ,
पर कुछ भी कहना नहीं आसां। 

जिनको नहीं तैरना आता ,
विपरीत बहना नहीं आसां। 

कुछ ज़ख्म नासूर बन जाते ,
हर ज़ुल्म सहना नहीं आसां। 

जो नफरतों ने खड़ी कर दी ,
दीवार ढहना नहीं आसां। 

 





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