Wednesday, 12 February 2014

देवी देवताओं का बाज़ार ( तरकश ) डा लोक सेतिया

बहुत ही विकट समस्या खड़ी हो गई है। चित्रगुप्त जी ने धर्मराज जी से साफ कह दिया है कि वे अब सेवा निवृत होना चाहते हैं। अब उनसे पाप पुण्य का हिसाब संभाला नहीं जा रहा , धर्मराज कोई अन्य व्यवस्था के लें जितना जल्द हो सके। धर्मराज जी को आज तक वी आर एस जैसी किसी स्कीम की कोई जानकारी नहीं थी , जिसको आधार बना चित्रगुप्त जी ने अपनी अर्ज़ी दी है। धर्मराज चित्रगुप्त को समझा रहे हैं कि अगर आप सब के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब नहीं देखोगे तो उनको बहुत परेशानी होगी। ऐसे में वो न्याय नहीं कर पायेंगे। अब तक आप ये कार्य पूरी निष्ठा पूर्वक करते रहे हैं , ये अचानक आपको क्या सूझी है। चित्रगुप्त बता रहे हैं कि अब उनका काम करना बेहद कठिन हो गया है , क्योंकि सभी देवी देवता उनके कार्य में अनावश्यक रूप से दखलंदाज़ी करने लगे हैं। आये दिन कोई न कोई देवी देवता उनको सूचित किया करते हैं कि उन्होंने किसी के सब पाप और अपराध माफ कर दिये हैं , अपराधी उनके दर पर क्षमा मांगने आये थे चढ़ावा लेकर। ये तो सरासर रिश्वतखोरी है। भ्रष्टाचारी घोटालेबाज़ तक जब पकड़ में आते हैं तब इनकी शरण में पहुंच जाते हैं। इन बड़े लोगों को न कोई अदालत सज़ा दे पाती है न हम ही दे सकते हैं। क्या यहां भी छोटे छोटे चोर सज़ा पायेंगे और बड़े बड़े माफी पाते रहेंगे। धर्मराज भी ये जानकर चिंतित हो गये , सोचने लगे तभी धरती पर अपकर्म बढ़ता ही जा रहा है। ये तो देवी देवता अराजकता फैला रहे हैं दिल्ली की सरकार की तरह। आप अभी सब देवी देवताओं को सूचित कर कि वो ऐसा कोई काम नहीं करें जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ये बात सपष्ट की जाती है कि किसी भी देवी देवता को अधिकार नहीं है अपने भक्तों के पाप और अपराध क्षमा करने का। किसी की शरण में जाने मात्र से कोई बच नहीं सकता अपने कर्मों का फल भोगने से। कोई धर्म गुरु कोई देवता अगर अपने अनुयायियों को गुमराह करता है ये कह कर कि वो उनके अपकर्मों को क्षमा करवा सकता है तो वो न केवल सृष्टि के नियमों का अनादर करता है बल्कि खुद भी उनके पापों का सहभागी है। भविष्य में ऐसा करने वाले लोगों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
                                 अब चित्रगुप्त कार्य करने को राज़ी हो गये हैं। सब देवी देवताओं को चित्रगुप्त जी का खुला पत्र मिला है एक चेतावनी के रूप में। निर्देश दिया गया है कि अब कोई अगर किसी के पाप और अपराध क्षमा करने का प्रस्ताव उनके पास भेजेगा तो उस पर कड़ी करवाई की जायेगी। ईश्वर तब निर्णय करेगा कि उनका देव पद पर रहना उचित है अथवा अनुचित। पत्र को पढ़ते ही खलबली मच गई है देवी देवताओं में , चिंता होने लगी है कि कहीं ये बात उनके भक्तों तक न पहुंच जाये कि उनके पास वरदान देने या किसी के कर्मों का फल नहीं मिलने देने का अधिकार ही नहीं है। ऐसे में तो उनके धर्मस्थलों के सामने लगने वाली कतारें ही नहीं रह जायेंगी। फिर तो हम केवल नाम को ही देव रह जायेंगे। सभी देवी देवता एक साथ मिल कर ईश्वर के पास गये हैं मांग पत्र लिये कि उनको ऐसा अधिकार होना चाहिये।
                                    ईश्वर उन सब को समझा रहे हैं कि आप सभी व्यर्थ की चिंता कर रहे हैं। क्या जो आपके भक्त हैं वो केवल आप पर भरोसा करते हैं , क्या वो कभी इस कभी उस तरफ डांवाडोल नहीं हुए रहते। आज के आपके भक्त तो बाज़ार के ग्राहक कि तरह हैं , किसी भी एक दुकानदार पर इनको भरोसा नहीं है। हर दुकानदार भी मुनाफा ही कमाता है , मगर मुफ्त उपहार और छूट का प्रलोभन देकर ग्राहकों को आकर्षित करता है। आपको भी ये बात समझनी होगी , आखिर ये भक्त आप में से ही किसी न किसी के दर पर ही तो आयेंगे। जैसे दुकानदार उपहार और छूट की बात कहते हैं लेकिन साधते खुद अपना आर्थिक हित ही हैं , उसी तरह आप भी क्षमा और वरदान का झूठा भ्रम बनाये चुपचाप सब देखते रहो। आपकी असलियत कोई भक्त कभी नहीं जान पायेगा। ये बात आपको भी जान लेनी ज़रूरी है कि कर्मों का फल तो आपको भी भोगना होगा , अगर आप पाप और अपराध को बढ़ावा देंगे तो देवी देवता नहीं रह जायेंगे। ईश्वर की बात सब समझ गये हैं , लेकिन ये भी जान गये हैं कि ये अंदर की बात है , किसी को कानोकान खबर न हो।