Thursday, 12 December 2013

झूठे कहीं के ( व्यंग्य ) डा लोक सेतिया

वकील किसी के मित्र होते तो नहीं मगर वो खुद को मेरा मित्र बताते हैं तो मेरे पास नहीं मानने का कोई तर्क नहीं होता। तलाक के मुकदमों के माहिर समझे जाते हैं। आजकल सब को मिठाई खिला रहे हैं। जब से खबर पढ़ी है अख़बार में कि एक नया कानून बनाने जा रही है सरकार जिसमें प्रावधान होगा कि तलाक लेने पर पत्नी को पति की अर्जित सम्पति के साथ साथ उसकी पैतृक सम्पति से भी बराबर का हिस्सा मिलेगा। अभी तक उनकी तलाक दिलवाने के मुकदमें की फीस इस बात को देख कर तय की जाती थी कि तलाक लेने के बाद महिला को अपने पति से क्या कुछ मिलने वाला है। वैसे उनको पुरुषों के तलाक के मुकदमें लड़ने से भी इनकार तो नहीं लेकिन वे खुद को नारी शक्ति , महिला अधिकारों और औरतों की आज़ादी का पक्षधर बताने में गर्व का अनुभव करते हैं। इस नया कानून बन जाने से उनके पास महिलाओं के तलाक लेने के मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी ऐसा उनको अभी से लग रहा है और वो अपनी फीस भी बढ़ाने की सोचने लगे हैं। मेरे घर खुद आये मिठाई बांटने और मेरी पत्नी से इस विषय पर ही चर्चा करने लग गये। मैंने कहा वकील साहब इन तिलों में तेल नहीं है , आपकी भाभी जी मुझसे कभी तलाक नहीं लेने वाली।  वे बोले मित्र बुरा मत मानना , मुझे तो हर इक महिला अपनी मुव्वकिल नज़र आती है। क्या पता कब भाभी जी का भी मन बदल जाये और उनको मेरी सहायता की ज़रूरत आन पड़े। इनसे तो मैं फीस भी नहीं ले सकूंगा , आखिर को हम मित्र हैं और मित्र की पत्नी से भला मैं फीस ले सकता हूं। तुम दोनों का विवाह भी मैंने ही करवाया था अदालत में , क्या गवाह बनने की कोई फीस मांगी थी। तुम दोनों ने जो उपहार दिया उसी को अपनी फीस समझ लिया था। लेकिन कभी मुझे तुम्हारी तरफ से तलाक का मुक़दमा लड़ना पड़ा तो फीस दोगुणी लूंगा तुमसे। तुम्हें आज़ादी की कीमत तो चुकानी ही होगी , तब मोल भाव मत करना। उनसे पुरानी मित्रता है इसलिये समझता हूं कि वकील कभी किसी के दोस्त नहीं हो सकते। भला घोड़ा घास से यारी कर सकता है। हर वकील को लड़ाई झगड़ा , दुश्मनी , चोरी डकैती जैसी बातें अपने कारोबार के लिये आशा की किरण नज़र आते हैं। समाज में अपराध और अपराधी न हों ये कोई वकील कभी नहीं चाहता , ऐसा हो गया तो सब के सब वकील भूखे मर जाएंगे।
          अभी वकील साहब हमें तलाक के फायदे समझा ही रहे थे कि उनकी धर्म पत्नी अर्थात हमारी भाभी जी भी आ गई। पत्नी को देख वकील साहब की हालत भी वैसी ही हो गई जैसी किसी भी पति की होती है जो पूरी दुनिया में बदलाव लाने की बात करता फिरता हो मगर खुद अपने घर कुछ भी बदलने को तैयार नहीं हो। भाभी जी मेरी तरफ मुखातिब हो कर बोली कि मैं जानती हूं ये किस ख़ुशी में मिठाई बांटते फिर रहे हैं। इसलिये आज इनके सामने ही आपसे पूछने आई हूं कि मुझे भी बताओ कोई ऐसा वकील जो मेरा इनसे तलाक करवा सके। मुझे भी देखना है कि दूसरों का घर बर्बाद करने वाले का जब खुद का घर बर्बाद हो तो उसकी कैसी हालत होती है। मैं आपसे सवाल करना चाहती हूं कि जो लोग , जो समाज कानून होने के बावजूद आज तक बेटियों को सम्पति का अधिकार नहीं देता है वो कानून बन जाने से बहुओं को आसानी से दे देगा। कहीं ऐसा न हो जैसे आजकल बलात्कारी बलात्कार कर के बच्चियों को जान से ही मार देते हैं वही तलाक चाहने वाली महिलाओं के साथ भी होने लग जाये। जायदाद की खातिर भाई भाई का दुश्मन बन जाता है तो जो पत्नी छुटकारा चाहती हो उसे छोड़ देगा उसका पति।
      आज तक आपका ये समाज महिलाओं को सुरक्षित जीने का अधिकार तो कभी दे नहीं सका न ही किसी सरकार ने कभी सोचा है कि जब आधी आबादी को इतना भी मिल नहीं सका तो फिर आज़ादी के क्या मायने हैं। और बात कर रहे हैं पैतृक सम्पति पति की से पत्नी को तलाक के बाद हक दिलाने का। मैं आपके सामने आपके इन वकील मित्र से पूछती हूं कि वे तैयार हैं मुझे तलाक देने के बाद अपनी सम्पति से बराबरी का हिस्सा देने को। आप ही बता दो कोई वकील जो मुझे भी ये सब दिलवा सकता हो , मिठाई मैं भी खिला सकती हूं आपको। ये सुनते ही वकील साहब का चेहरा देखने के काबिल था। उनके तेवर झट से बदल गये थे , अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर बोले से आप तो बुरा मान गई , भला आपको कभी तलाक दे सकता हूं मैं। मैं आपके बिना एक दिन भी नहीं रह सकता। आप ही मेरा प्यार हैं , मेरी ज़िंदगी हैं , मेरी दुनिया हैं , मेरा जो भी है सभी आपका ही तो है। बस दो बातों से उनकी पत्नी का मूड बदल गया था , और वो हंस कर बोली थी , बस ऐसे ही प्यार भरी बातों से बहला लेते हो आप सब पति लोग हम महिलाओं को हमेशा। वकील साहब कहने लगे कसम से सच कह रहा हूं।  उनकी पत्नी बोली थी जाओ झूठे कहीं के। सुन कर मुस्कुरा दिये थे वकील साहब , झूठे कहीं के सुन कर उन्हें बुरा क्यों लगता।

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