अगस्त 29, 2026

POST : 2117 हम सभी से उम्र भर डरते रहे हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

    हम सभी से उम्र भर डरते रहे हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया  

 
हम सभी से  , उम्र भर डरते रहे हैं 
कब जिए हम रोज़ बस मरते रहे हैं ।
 
दुश्मनी को दोस्ती का नाम दे कर 
दोस्ती की , इल्तिजा करते रहे हैं । 
 
खा के ठोकर भी नहीं संभले कभी हम 
फिर फ़िसल कर के , वहीं गिरते रहे हैं । 
 
था सुना  , कुछ लोग होते थे जहां में  
जो पराये  दर्द  को ,  हरते रहे हैं ।  
 
क्या किया सरकार ने कैसे बताएं 
खेत माली  सब यहां  चरते रहे हैं । 
 
कौन सच की बात करता है यहां पर  
झूठ से गागर सभी भरते रहे हैं ।  
 
नाख़ुदा बन कश्तियां ' तनहा ' डुबोते 
आसरा तिनके का , ले तरते रहे हैं ।    
 
 

 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

Wahhh बहुत बढ़िया अशआर सर👌👍