Friday, 30 October 2020

इम्युनिटी बढ़ाने का तरीका ( हास्य-व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

    इम्युनिटी बढ़ाने का तरीका ( हास्य-व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया 

           ये शोध मैंने किया है घर बैठे ही किसी लैब या अस्पताल में नहीं जाना पड़ा ज़रूरत ही नहीं है। मेरी दरियादिली देखिये मैंने अपने शोध को सार्वजनिक करने का काम खुलेआम किया है कोई मुनाफ़ा नहीं कमाना चाहता न ही ज़रा भी घबरा रहा हूं कि कोई खफ़ा हो सकता है। आजकल कितने विज्ञापन देखने को मिल रहे हैं इम्युनिटी बढ़ाने को कुछ भी बेचने का धंधा होने लगा है। किस किस उत्पाद की बात करें हम्माम में सभी नंगे हैं। मैंने चिंतन किया ध्यान लगाया अपने अध्यन और तजुर्बे को समझा तब जाना कि मेरे ज़िंदा रहने का सबसे बड़ा कारण मेरा विवाहित होना है क्योंकि अधिकांश कुंवारे पुरुष इतनी लंबी आयु तक जीवित रहते देखे नहीं हैं। महिलाएं समझती हैं ये उनकी देखभाल का नतीजा है और हमने बिना किसी सबूत महिलाओं की करवा चौथ से लेकर हर सफल पुरुष के पीछे किसी महिला का हाथ होने तक हर बात को स्वीकार कर कर लिया है। कल किसी महिला ने लिखा था महिलाएं अच्छा पति पाने को उपवास रखती हैं फिर भी उनको मनपसंद जीवनसाथी मिलता नहीं है। हर महिला अपने पति को जीवन भर सुधारती रहती है मगर पूर्णतया ऐसा होता नहीं जबकि पति अधिकांश कहते हैं अपनी पत्नी को तुझसे अच्छी मुझे कोई नहीं मिल सकती थी। ऐसा नहीं कहने वाले पति सुखी जीवन का रहस्य समझने में असफल रहते हैं। जो मिल गया उसी को मुकदर समझ लिया पुरुष की सोच यही होती है खुद अपने बिछाये जाल में फंसे चाहे माता पिता की मर्ज़ी के आगे सर झुकाया क्या फर्क पड़ता है। चढ़ जा बेटा सूली पर भली करेंगे राम हर विवाहित अविवाहित को ये सलाह देकर सोचता है अपने जैसा हाल उसका भी होना चाहिए। दोस्त दुश्मनी निभाने को शायद यही करते हैं एहसान जतलाते हैं तेरी शादी मैंने करवाई थी। बेचारा पत्नी के सामने बोल भी नहीं सकता मत करता ये एहसान अच्छा होता। 
 
        शादी करके पछताते हैं तो अब मत पछताना क्योंकि शादी से आपको वो मिला है जो आजकल हर कोई चाहता है इम्युनिटी हासिल करना बढ़ाना ताकि ज़िंदा रहने को बीमारी से लड़ने की ताकत मिल सके। किसी भी रोगाणु से लड़ने की क्षमता उस से लड़कर उसे हराकर मिलती है। पत्नी आपको हर रोज़ कितनी बार लड़ने का अवसर उपलब्ध करवाती है। जानते हैं पत्नी से जीतना मुमकिन नहीं फिर भी हार नहीं मानते हैं कहने को गलती मान भी लेते हैं मगर दिल से कभी नहीं स्वीकार करते। ये भला कैसे कोई कर सकता है कि हर बार गलती पति की और पत्नी हमेशा ही सही हो। ये जंग जारी रहती है और आपको लड़नी पड़ती है लड़ाई चाहो या नहीं भी चाहो लड़ना मज़बूरी है। हम सभी वास्तव में खतरों के खिलाड़ी हैं हम खतरों को खुद अपने पास बुलाते हैं घबराते नहीं हैं खतरों से इक व्यंग्य कवि पत्नी को आफ़त मुसीबत से भी बढ़कर आतंकी बताते थे। खुद ही अपने घर पर बंब फैंकने को कहते थे। 
 
           मुहब्बत में और जंग में सब जायज़ होता है शादी मुहब्बत भी है और जंग भी ये कमाल का बंधन है अब तो कोई पुरुष और महिला कहीं भी पार्क बाज़ार या सिनेमा हाल से होटल तक लड़ते बहस करते नज़र आएं तो उनके पति पत्नी होने का पक्का सबूत समझा जाता है। वैसे तो दुनिया में महाभारत से लेकर कितनी ही लड़ाईयां किसी महिला के लिए या किसी महिला के कारण हुई हैं। लेकिन पति पत्नी की लड़ाई उन सभी से बड़ी और निरंतर जारी रहने वाली जंग है जिस को लेकर संख्या गिनती सुपर कंप्यूटर भी करने में नाकाम हैं। शादी आपकी सहनशक्ति का इम्तिहान भी है और आपके अदम्य साहस का सबूत भी है। आधुनिक सभ्यता वाले देशों में छोटी छोटी बात पर पति पत्नी अलग हो जाते हैं जबकि भारत में लड़ झगड़ कर भी साथ जीना संग संग मरना की कसम खाई जाती है निभाई जाती है। सात जन्म यही भूल दोहराई जाती है। आपस में लड़ने झगड़ने की ताकत हर दिन आज़माई जाती है कुछ इसी तरह से क्षमता बढ़ाई जाती है। हार जीत खेल की भावना से स्वीकार करते हैं हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं हर बार करते हैं। 
 
        अपनी इम्युनिटी बढ़ाने का ये सबसे बढ़िया तरीका है इस काम के लिए कुछ भी और नहीं चाहिए। बस इक पति बस एक पत्नी होना बहुत है। मुझे डर है कोई इसका गलत मतलब नहीं निकाल ले और सोचने लगे कि दो चार शादी करने से और अधिक फ़ायदा हो सकता है ये बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है क्योंकि एक साथ कितनी बिमारियों से कोई लड़ सकता है। सावधान जिनको पहले कई रोग मधुमेह या हृदय जिगर गुर्दे के होते हैं उनको खतरा बढ़ जाता है। इम्युनिटी बढ़ाने को एक ही काफी है झूठ कहना नाइंसाफी है। विवाह करवाने वाले मेरे शोध का इस्तेमाल नहीं कर सकते ये केवल निजी उपयोग के लिए है इसका वाणिजयक उपयोग करने की अनुमति कदापि नहीं है। चेतावनी आपके विवाह करने या नहीं करने तथा पति पत्नी के लड़ने झगड़ने का निर्णय आपका खुद का होगा और हम इसकी कोई ज़िम्मेदारी अपने पर नहीं लेते हैं। एलोपैथिक दवाओं की तरह इस से भी नुकसान फ़ायदे का गणित आपका होगा। ये काल्पनिक कथा की तरह है जिस का किसी से कोई संबंध नहीं है और अगर आपको लगता है कि ये आपसे संबंधित है तो ये केवल एक इत्तेफ़ाक़ की बात है।