Tuesday, 25 July 2017

जवाब मिल गया सवालों का ( व्यंग्य कहानी ) डॉ लोक सेतिया

   जवाब मिल गया सवालों का ( व्यंग्य कहानी ) डॉ लोक सेतिया

                 हल तलाशें सभी सवालों का , है यही रास्ता उजालों का।

तलाश करने से सब मिलता है। इक दिन तमाम नेताओं को पता चला इक जानकार है जो अपने सॉफ्टवेयर से हर सवाल का बिल्कुल सही हल बता देता है , बदले में लेता कुछ भी नहीं। इक शपथ खिलवाता है कि राज़ की बात बतानी नहीं किसी को , इतना ही बता सकते हो कि मेरी बात बिल्कुल सच है। राजा बेटा सब से पहले जा पहुंचा और पूछा मेरे देश का हाल बहुत बुरा है और सब बाकी दल वाले हमारे दल को दोष देते हैं। अभी तक मैं खुद शासक नहीं बना न ही मेरी माता  जी भी। पिता राजनीति में  नहीं आना चाहते थे मगर आना पड़ा , उनको अपनों ने ही बदनाम कर दिया और इक दिन बेमौत मारे गए। दल वालों को मेरी माता जी से अच्छा कोई नहीं मिला दल को ज़िंदा रखने को इसलिए उन्हें बुलाया गया मनुहार से। आप सब जानते हैं इतिहास क्या है , मुझे चिंता है देश में आखिर कब वास्तविक आज़ादी आएगी। क्या मैं ये काम कर सकता अगर शासक बन गया या फिर किसी कठपुतली की तरह नाहक बदनाम हो जाऊंगा। सॉफ्टवेयर से लिखित पर्ची निकाल उसे दे दी थी पढ़कर फाड़ देनी थी। परिणाम लिखा था , आप शासक बन जाओ तो पचास साल में देश को सब हासिल हो सकता है। मगर तुम शासक बनोगे कैसे , लोग पप्पू समझते हैं तुमको। आजकल लोग सीधे आदमी को गधा समझते हैं , तुम्हारी बातों की खिल्ली उड़ाते हैं। लोगों को बड़ी बड़ी बातें ऊंचे ऊंचे सपने पसंद हैं कि कोई देवता या मसीहा आकर सब ठीक करेगा जादू की छड़ी से। राजा नंगा है कहानी में ठग लोभी थे अब शासक लोभी जी हैं जो अच्छे दिनों की इक पोशाक बेच गए जिसका अस्तित्व ही नहीं है। और उसी तरह जैसे राजा बिना कुछ पहने निकला था और लोग जनता राजा को नंगा देख कर भी चुप भी थी और जय जयकार कर पुष्प भी बरसा रही थी , अब भी गंदगी को स्वच्छता और गरीबी को खुशहाली और ख़ुदकुशी को नासमझी बता रही है। सब पहले से बुरा है फिर भी धनबल से टीवी अख़बार मीडिया में उसी लोभी जी की महिमा का गुणगान करते हैं। शाइनिंग इंडिया से भारत निर्माण तक सब से जो नहीं हुआ इश्तिहारी विकास उसी को दोहराया जा रहा है। मगर जो तुम चाहते हो वास्तव में करना हो तो तुम्हें पचास साल तक शासक बनकर काम करना होगा। भाग्य में लिखा होगा तो अवश्य बनोगे , देख सकते हो कौन कौन भाग्य से किस जगह जा पहुंचा है। इक परिवार की शाखा में जाने वाले पेड़ की डाली को पकड़े शिखर तक जा पहुंचे हैं। 
                कठोर सिंह जी , निराश कुमार , छाया वती जैसे सभी यही सवाल पूछने गए और अपना अपना जवाब पढ़कर वापस चले आये। किसी को चालीस किसी को सौ बरस लगने की बात बताई सॉफ्टवेयर ने। जब लोभी जी को पता चला तो पहुंचे वो भी दर पर बहुत चढ़ावा लेकर , कहने लगे इसे आप रिश्वत नहीं समझना। मैंने घूसखोरी शब्द को ही शब्दकोश से निकलवा दिया है , मैंने जिसे भी देता दान या उपहार बता देता हूं। अपने लोग क्या विदेश तक बहुत बांट रहा हूं नाम शोहरत की खातिर , किसी ने अनुचित कहने का साहस किया नहीं। मगर सॉफ्टवेयर वाले ने कहा आपकी सब चीज़ें मेरे किसी काम की नहीं हैं। आप चिंता नहीं करें आपको सटीक भविष्यवाणी मिलेगी। और पर्ची लिखी निकली अभी तीन साल जिस तरह किया काम उस तरह आपको दो सौ साल शासक बनकर रहना होगा तब सब बदलेगा। अभी तो आप दो साल बाद की ही चिंता में डूबे हैं और आपके चाटुकार बीस बरस लोभी जी की बातें सोशल मीडिया पर करते हैं। उन्हें याद ही नहीं संविधान क्या है और वो तय नहीं कर सकते कितने साल कौन रहेगा। तुम भी समझ लो , शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है , जिस डाल पे बैठे हो  टूट भी सकती है। आप भी जानते हैं इस तरह के झूठे प्रचार की टहनी कितने लोग थामे रहे और परिणाम क्या हुआ। लोभी जी को अब कोई दूसरा काम नहीं करना , बस अंग्रेज़ों की तरह दो सौ साल शासन करना है। लोभी एक लोभी दो से लोभी बीस तक भी नाम लोभी जी ही रहेगा। 
                     बहुत खोज कर हल मिल ही गया है , लोभी जी के क्लोन बनवाये जा रहे हैं , उनकी उम्र दो सौ साल नहीं हो सकती तो क्या है हर बीस साल बाद नया क्लोन उनकी जगह लिया करेगा। इंडिया में अब एक ही नेता है जो सब कुछ करना चाहता है और कर सकता है। किसी और को अपने बराबर कद का होने नहीं देना है। ज़िंदा रहे न रहे शासक उन्हीं का नाम उन्हीं की सूरत का होगा। 

             तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की भी सूरत ,

                हम जहां में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं। 

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अख़बार पत्रिका वाले मेरी इस रचना को छाप सकते हैं। मौलिक है और बिल्कुल आधुनिक भी।

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