Monday, 6 March 2017

इस तरह महिला दिवस मनाया गया ( व्यंग्य-कहानी ) डॉ लोक सेतिया

हर साल शहर की महिलाओं का संगठन आठ मार्च को महिला दिवस मनाता ही है , जिस में शहर के सब से वरिष्ठ अधिकारी की धर्मपत्नी और विधायक और सांसद की पत्नियां मुख्य अतिथि होती हैं अध्यक्षता करती हैं। उनको महीना भर पहले से अनुरोध करना पड़ता है ताकि वो सभी उस दिन उपस्थित रहकर सभा की शोभा बड़ा सकें और महिलाओं का मार्गदर्शन कर सकें। इस बार भी ऐसा ही दोहराया गया और बड़े अधिकारी से मिल उनकी धर्मपत्नी को अध्यक्षता करने की विनती की गई। अधिकारी प्रशासनिक कार्य करने के साथ साथ लेखन का कार्य भी करते हैं और उन्होंने कहा आप बतायें हर साल आप कैसे मनाती हैं महिला दिवस। उन्हें बताया गया उस दिन सब शिक्षित और धनवान घर की महिलायें एकत्र होती हैं किसी जगह और महिलाओं के अधिकारों और उनकी समस्याओं पर भाषण दिये जाते हैं सुनकर तालियां बजाई जाती हैं। सब बन ठन कर आती हैं और कई तरह से मनोरंजक खेल खेले जाते हैं , सौंदर्य प्रतियोगिता , फैशन और कैसे खुद को फिट रखती हैं पर विमर्श किया जाता है। शहर में सब से सुंदर महिला का ख़िताब दिया जाता है और विवाहित महिला होकर भी खुद को बेहद आकर्षक बनाये रखने वाली महिला को सम्मानित किया जाता है। गीत संगीत होता है नाच गाना होता है और शीतल पेय से शुरू होकर स्वादिष्ट भोजन कई प्रकार का परोसा जाता है , अंत में चाय कॉफी और स्मृति चिन्ह मिलते हैं सभी महिलाओं को। इस तरह उस दिन महिलायें केवल मौज मस्ती करती हैं दिन भर और साबित किया जाता है कि आज की महिला जागरुक है और किसी भी तरह पुरुष से कमतर नहीं है।
                                         अधिकारी को सब समझ आ गया और उसने कहा ये तो बहुत अच्छी बात है , पर क्या मैं भी उस आयोजन में शामिल होकर कुछ नया और सार्थक प्रयास कर सकता हूं। मैं चाहता हूं इस बार प्रशासन ये सब प्रबंध शानदार तरीके से करे और किसी बड़े मंत्री की पत्नी को भी आमंत्रित किया जाये। महिला संगठन इस पर राज़ी हो गया तो अधिकारी ने इक आग्रह और किया कि क्यों नहीं इस बार हम मिलकर समारोह तीन दिन पहले करें और आठ मार्च को उन महिलाओं से मिलकर उनके लिये कुछ सार्थक किया जाये जिन को शायद पता ही नहीं रहता किस दिन महिला दिवस है। इस तरह निर्णय हो गया तीन दिन पहले ही महिला दिवस मनाने का। और सब जैसा हर साल होता था उसी तरह और भी शानदार ढंग से किया गया , सारा प्रबंध भी प्रशासन ने किया और आलीशान बैंकट हाल में। आखिर में अध्यक्षीय संबोधन में अधिकारी ने प्रस्ताव रखा कि जो महिलायें आपके हमारे घरों में काम करती हैं उस दिन उनका अवकाश रख उनको महिला दिवस का उपहार दिया जाये , जो महिलायें मज़दूरी करती हैं उनको उस दिन छुट्टी देने की खातिर हम में से जो महिलायें सुख सुविधा से जीती हैं इक दिन उनका काम उनकी जगह करें। बोझ उठाना खेत में काम करना इंटें उठाना मिट्टी गोबर का काम करना , किसी ऑफिस की सफाई करना जैसे जितने भी काम उनको साल भर बिना अवकाश करने होते हम करें ताकि उनकी दशा हम समझ सकें। अधिकारी ने मंच से ही पूछा सभी बतायें क्या उस दिन वो ये करने को राज़ी हैं। सब ये सुनकर अचंभित भी थीं मगर दिखावे को सब ने हामी भी भर दी तालियां बजाकर। और घोषणा हो गई आठ मार्च को सुबह ही फिर से उसी जगह एकत्र होने की ताकि अधिकारी के बताये हुए स्थान पर जाकर सब अलग अलग अपना दायित्व निभा महिला दिवस को सार्थक बना सकें। आज महिला दिवस है मगर कोई भी महिला मंच की महिला आई नहीं है , सब ने कहलवा दिया है व्यस्त होने के कारण उपस्थित नहीं हो पाने की क्षमाप्राथी हैं। इस तरह देश की अधिकतर महिलाओं की तरह मेरे शहर की भी अधिकतर महिलायें आज भी अपनी रोज़ी रोटी की जद्दोजहद में लगी नहीं जानती ये महिला दिवस क्या बला है , इस को मनाने में किसका भला है।

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