हमने देखा है मिल कर सभी से ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '
हमने देखा है मिल कर सभी सेलोग लगते हमें अजनबी से ।
जो था पाया सभी खो दिया है
कुछ नहीं चाहिए अब किसी से ।
आप हमसे खफ़ा हो गए क्यूं
इक ज़रा प्यार की दिल्लगी से ।
जो था पाया सभी खो दिया है
कुछ नहीं चाहिए अब किसी से ।
आप हमसे खफ़ा हो गए क्यूं
इक ज़रा प्यार की दिल्लगी से ।
अब तो कोई ठिकाना बना लो
क्या मिलेगा यूं आवारगी से ।
आप नासेह से पूछना तो
क्या मिलेगा खुदा बंदगी से ।
कौन तूफ़ान को रोक पाया
बच सकोगे न तुम आशिकी से ।
आप नासेह से पूछना तो
क्या मिलेगा खुदा बंदगी से ।
कौन तूफ़ान को रोक पाया
बच सकोगे न तुम आशिकी से ।
हम अकेले ही अच्छे थे ' तनहा '
मार डाला हमें बेरुखी से ।
मार डाला हमें बेरुखी से ।

1 टिप्पणी:
Wah aap naseh se👍👌
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