नवंबर 23, 2012

POST : 247 हमने देखा है मिल कर सभी से ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

हमने देखा है मिल कर सभी से  ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

हमने देखा है मिल कर सभी से 
लोग लगते हमें अजनबी से ।

जो था पाया सभी खो दिया है 
कुछ नहीं चाहिए अब किसी से ।

आप हमसे खफ़ा हो गए क्यूं 
इक ज़रा प्यार की दिल्लगी से ।
 
अब तो कोई ठिकाना बना लो 
क्या मिलेगा यूं आवारगी से ।

आप नासेह से पूछना तो  
क्या मिलेगा खुदा बंदगी से ।

कौन तूफ़ान को रोक पाया 
बच सकोगे न तुम आशिकी से ।
 
हम अकेले ही अच्छे थे ' तनहा '
मार डाला हमें बेरुखी से । 
 

 

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