दिसंबर 03, 2012

POST : 251 बेवफ़ा हमको कह गये होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

बेवफ़ा हमको कह गये होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

बेवफ़ा हमको कह गये होते
हम ये इल्ज़ाम सह गये होते ।

बहते मौजों के साथ पत्थर भी
जो न साहिल पे रह गये होते ।

ग़म भी हमको सकून दे जाता
हंस के उसको जो सह गये होते ।

ज़ेब देते किसी के दामन को
अश्क जो यूं न बह गये होते ।

यूं न हम राह देखते उनकी
जो न आने को कह गये होते ।

चाह जीने की दिल में थी वरना 
अलविदा कब के कह गये होते ।
 
नाख़ुदा को ख़ुदा समझते जो 
तो  , किनारे न रह गए होते ।  
 

 

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