Expressions by Dr Lok Setia ( डॉ लोक सेतिया का लेखन )

मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।

जुलाई 31, 2024

POST : 1871 दिल की धड़कन नज़र के नूर रहे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

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     दिल की धड़कन नज़र के नूर रहे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया   दिल की धड़कन नज़र के नूर रहे  पास रह कर भी कितना दूर रहे ।    एक होंठों तलक पहुंचा न क...
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जुलाई 29, 2024

POST : 1870 स्वर्गवासी और नर्कवासी महागठबंधन ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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  आधा सच है आधा झूठ ( अधूरी बात पूरी ) डॉ लोक सेतिया                    राजा के पुण्य का प्रभाव ( अंतर्यात्रा ) संकलित  एक धर्मात्मा राजा थ...
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जुलाई 28, 2024

POST : 1869 ख़्वाब अधूरा रह गया ( निबंध ) डॉ लोक सेतिया

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           ख़्वाब अधूरा रह गया ( निबंध ) डॉ लोक सेतिया   बड़ी गहरी नींद आधी रात को कभी खुल जाती है और लगता है कोई सुहाना ख़्वाब देख रहे थे जो इ...
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जुलाई 26, 2024

POST : 1868 हमको मिली सज़ाएं हर बार तेरे दर पे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

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  हमको मिली सज़ाएं हर बार तेरे दर पे ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया      हमको मिली सज़ाएं , हर बार तेरे दर पे  आये हैं आज फिर हम सरकार तेरे दर पे ।    ...
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जुलाई 24, 2024

POST : 1867 खेल है नसीबों का ज़िंदगी ( अफ़साना ) डॉ लोक सेतिया

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      खेल है नसीबों का ज़िंदगी  ( अफ़साना  ) डॉ लोक सेतिया   नाम में क्या रखा है की बात पुरानी है नाम क्या है से नामकरण तक कितना कुछ बदल गया ह...
जुलाई 17, 2024

POST : 1866 क़ातिल ही मुंसिफ़ है ( न्याय दिवस ) डॉ लोक सेतिया

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    क़ातिल ही मुंसिफ़ है ( न्याय दिवस ) डॉ लोक सेतिया       मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है क्या मेरे हक़ में फ़ैसला देगा ( सुदर्शन फ़ाकिर )        ...
जुलाई 16, 2024

POST : 1865 ये दुनिया ये महफ़िल ( खाना - ख़ज़ाना ) डॉ लोक सेतिया

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  ये दुनिया ये महफ़िल  ( खाना - ख़ज़ाना  ) डॉ लोक सेतिया  महफ़िल में जिसे देखा तनहा-सा नज़र आया सन्नाटा वहां हरसू फैला-सा नज़र आया । हम देखने व...
जुलाई 13, 2024

POST : 1864 चश्मदीद गवाह क़त्ल का ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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        चश्मदीद गवाह क़त्ल का ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया  इतने साल तक खामोश रहने के बाद शायद उसकी अंतरात्मा जागी होगी तभी उस ने सार्वजनिक सभा ...
जुलाई 12, 2024

POST : 1863 बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी ( सरकारी फ़रमान ) डॉ लोक सेतिया

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  हत्या हुई फिर भी ज़िंदा है ( सरकारी फ़रमान ) डॉ लोक सेतिया   अध्यादेश जारी किया गया है कि उस दिन संविधान की हत्या हुई थी , इमरजेंसी लगी थी इ...
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जुलाई 11, 2024

POST : 1862 झूठ ही अपनी पहचान है ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

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     झूठ ही अपनी पहचान है ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया  ख़त्म हो चुकी सच की पहचान है , हर गली में खुली झूठ की दुकान है । दुनिया में सबसे बड़े ...
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जुलाई 10, 2024

POST : 1861 दो किनारों की अनबन ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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        दो किनारों की अनबन ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया  नदिया के पुल आपसी तालमेल सहमति और दोनों की सहनशीलता पर टिके होते हैं , जब भी कभी कोई प...
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जुलाई 09, 2024

POST : 1860 आज हमने छोड़ दिया ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

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      आज हमने छोड़ दिया ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया   सभी समझाते हैं और मैं भी मान जाता हूं छोड़ देना है , छोड़ना ही है किसी दिन , चलो आज से छ...
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जुलाई 08, 2024

POST : 1859 की इनायत ठुकरा कर मुझे ( परायापन ) डॉ लोक सेतिया

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      की इनायत ठुकरा कर मुझे ( परायापन ) डॉ लोक सेतिया   दिल नाहक उदास रहता था ये सोच कर कि हर शख़्स मुझे ठोकर लगा कर चला जाता है काश कोई मुझ...
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जुलाई 07, 2024

POST : 1858 पत्थर के इंसान सोने-चांदी के परिधान ( मेरा देश महान ) डॉ लोक सेतिया

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पत्थर के इंसान सोने-चांदी के परिधान ( मेरा देश महान ) डॉ लोक सेतिया  ऊपरवाला भी अजीब खिलाड़ी है किसी को नज़र ही नहीं देता दुनिया का नज़ारा देखन...
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जुलाई 05, 2024

POST : 1857 समझा नहीं जाना नहीं ईश्वर धर्म ( अज्ञानता ) डॉ लोक सेतिया

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   समझा नहीं जाना नहीं ईश्वर धर्म ( अज्ञानता ) डॉ लोक सेतिया ऐसा करने से पुण्य मिलेगा मनोकामनाएं पूर्ण होंगी समस्याएं दूर होंगी आदि आदि , ये...
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जुलाई 04, 2024

POST : 1856 निकले थे किधर जाने को पहुंचे कहां ( चीख-पुकार ) डॉ लोक सेतिया

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 निकले थे किधर जाने को पहुंचे कहां ( चीख-पुकार ) डॉ लोक सेतिया  ये भजन मेरी माता जी हर समय गाती - गुनगुनाती रहती थी । मैंने फिल्मों में और...
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जुलाई 03, 2024

POST : 1855 उजाला है बाहर भीतर अंधेरा ( विमर्श ) डॉ लोक सेतिया

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      उजाला है बाहर भीतर अंधेरा ( विमर्श ) डॉ लोक सेतिया  कभी कभी नहीं अक़्सर होता है आधी रात को नींद खुलती है और मन में कुछ घटनाओं को लेकर व...
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जुलाई 02, 2024

POST : 1854 ख़ामोश रहो हसरत है उनकी ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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      ख़ामोश रहो हसरत है उनकी ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया   उनकी सियासत मुसीबत है हमारी सत्ता को लगी है इक ऐसी बिमारी , जनता की बड़ी भूल जो की उन्ह...
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जुलाई 01, 2024

POST : 1853 लिखने को अल्फ़ाज़ जज़्बात अंदाज़ ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

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  लिखने को अल्फ़ाज़ जज़्बात अंदाज़ ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया  लिखना आसान नहीं , समझना मुश्किल है , लिखना क्या है । कभी उम्र भर लिखने से भी जो अंदर ...
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पांच पुस्तकें प्रकाशित :- ग़ज़ल , कविता , कहानी , व्यंग्य , हास्य- व्यंग्य विधाओं की हुई हैं।

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Dr. Lok Setia
Fatehabad, Haryana, India
प्रकाशित पुस्तकें :- फ़लसफ़ा -ए - ज़िंदगी ( ग़ज़ल संग्रह ) , एहसासों के फूल ( कविता संग्रह ) , हमारे वक़्त की अनुगूंज ( व्यंग्य रचना संग्रह ) , दास्तानें ज़िन्दगी ( कहानी संग्रह ) , शून्यकाल का आलाप ( हास्य-व्यंग्य रचना संग्रह )
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