Expressions by Dr Lok Setia ( डॉ लोक सेतिया का लेखन )

मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।

अगस्त 29, 2025

POST : 2005 फेसबुक से अलग दुनिया ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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       फेसबुक से अलग दुनिया ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया        आप भी शायद ऐसा करते हों किसी को ढूंढने को फेसबुक पर तलाश करते हों अथवा किसी का ...
अगस्त 27, 2025

POST : 2004 छुपा - छुपी खेल रहे हैं ( हास - परिहास ) डॉ लोक सेतिया

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   छुपा - छुपी  खेल रहे हैं ( हास - परिहास ) डॉ लोक सेतिया  बड़ी उम्र में भी बचपन के खेल खेलना जिनकी आदत होती है उनको हुनर आता है आधी अधूरी ब...
अगस्त 26, 2025

POST : 2003 अधर में लटके हुए हैं ( व्यंग्य - खरी खरी ) डॉ लोक सेतिया

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       अधर में लटके हुए हैं ( व्यंग्य - खरी खरी  ) डॉ लोक सेतिया  दो पाटों में पिसना इसी को कहते हैं , त्रिशंकु जैसी हालत है न ज़मीन पर न किस...
अगस्त 25, 2025

POST : 2002 तकदीर से कुछ मिला नहीं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ( बाईस वर्ष पुरानी लिखी ग़ज़ल 2003 की डायरी से )

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       तकदीर से कुछ मिला नहीं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया                        (  बाईस वर्ष पुरानी लिखी ग़ज़ल 2003 की डायरी से )   तक़दीर से कुछ मि...
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अगस्त 21, 2025

POST : 2001 अपराधियों की लक्ष्मणरेखा ( व्यंग्य - विनोद ) डॉ लोक सेतिया

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  अपराधियों की लक्ष्मणरेखा ( व्यंग्य - विनोद ) डॉ लोक सेतिया  हद निर्धारित करना ज़रूरी है , अपराध करना बुरा नहीं है अपराध कर आप राजनीति में प...
अगस्त 20, 2025

POST : 2000 कठपुतलियां नाच रहीं ( यत्र - तत्र - सर्वत्र ) डॉ लोक सेतिया

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    कठपुतलियां नाच रहीं ( यत्र - तत्र - सर्वत्र  ) डॉ लोक सेतिया  कब से दुनिया समझ रही थी इक बस उन्हीं का चर्चा है जिधर नज़र जाती जब भी कुछ आ...
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अगस्त 18, 2025

POST : 1999 कुछ कुत्तों की मौज कुछ को सज़ा ( व्यंग्य - कथा ) डॉ लोक सेतिया

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 कुछ कुत्तों की मौज कुछ को सज़ा ( व्यंग्य - कथा ) डॉ लोक सेतिया    कुत्तों का महत्व सभी जानते हैं लेकिन पहली बार कुत्तों का वर्गीकरण करने की ...
अगस्त 17, 2025

POST : 1998 सब पराए हैं ज़िंदगी ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया

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  सब पराए हैं ज़िंदगी ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया  सब पराए हैं ज़िंदगी ,  देख आए हैं ज़िंदगी ।    बिन बुलाए ही आ गए ,  चोट खाए हैं ज़िंदगी ।    हम खि...
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POST : 1997 जाएं तो जाएं कहां ( विचार - विमर्श ) डॉ लोक सेतिया

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     जाएं तो जाएं कहां ( विचार - विमर्श ) डॉ लोक सेतिया    घर से बाहर खुली हवा में सैर करने निकलते हैं हम सुबह शाम ,  दिखाई देते हैं दुनिया ...
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अगस्त 14, 2025

POST : 1996 ज़मीन नहीं आसमान नहीं ( 78 साल बाद ) डॉ लोक सेतिया

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   ज़मीन नहीं आसमान नहीं ( 78 साल बाद ) डॉ लोक सेतिया                            {  पिछली पोस्ट से आगे  }    डींगे हांकना बहादुरी का काम नहीं...
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अगस्त 13, 2025

POST : 1995 कितनी ज़मीन ज़रूरी है इंसान के लिए ? ? ( 15 साल पुरानी रचना 2025 तक हक़ीक़त ) डॉ लोक सेतिया

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            कितनी ज़मीन ज़रूरी है इंसान के लिए ? ?          ( 15 साल पुरानी रचना 2025 तक हक़ीक़त ) डॉ लोक सेतिया   अपनी इक पुरानी अलमारी से ढूंढ...
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अगस्त 10, 2025

POST : 1994 नकली की शान है मौला ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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          नकली की शान है मौला  ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया   हद से अब तो गुज़र गये हैं लोग ( ग़ज़ल )  डॉ लोक सेतिया "तनहा" हद से अब त...
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अगस्त 08, 2025

POST : 1993 लोकतंत्र के सारे राजा डाकू हैं ( संविधान - ? ) डॉ लोक सेतिया

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 लोकतंत्र के सारे राजा डाकू हैं ( संविधान - ? ) डॉ लोक सेतिया  आजकल चुनाव आयोग की प्रणाली पर इतने गंभीर सवाल उठने लगे हैं की देश की राजनीति ...
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अगस्त 07, 2025

POST : 1992 परदेसियों को है इक दिन जाना ( हास - परिहास ) डॉ लोक सेतिया

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  परदेसियों को है इक दिन जाना ( हास - परिहास ) डॉ लोक सेतिया  कोई हैरानी नहीं हुई जब अपने नगर से तीन महीने बाहर रहना पड़ा , जानता था किसी को ...
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अगस्त 05, 2025

POST : 1991 जिस्म यहां , आत्माएं विदेश भटकती ( राजनैतिक व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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जिस्म यहां , आत्माएं  विदेश भटकती ( राजनैतिक व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया  हमारे देश के राजनेताओं की दशा यही है , मैंने करीब तीस साल पहले इक रचना...
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जुलाई 31, 2025

POST : 1990 अभी तलक उसी जगह ( दोस्ती प्यार अपनापन ) डॉ लोक सेतिया

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  अभी तलक उसी जगह ( दोस्ती प्यार अपनापन ) डॉ लोक सेतिया  करीब करीब एक महीने बाद पोस्ट लिखने लगा हूं , सोचता बहुत रहा , लिखना चाहा मगर लिख नह...
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जून 26, 2025

POST : 1989 नादान हैं सच से अनजान हैं ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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      नादान हैं सच से अनजान हैं ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया  समझते हैं भगवान संविधान धरती आसमान कुछ भी नहीं जिस की समझ उनको नहीं है , पढ़ना जान...
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पांच पुस्तकें प्रकाशित :- ग़ज़ल , कविता , कहानी , व्यंग्य , हास्य- व्यंग्य विधाओं की हुई हैं।

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Dr. Lok Setia
Fatehabad, Haryana, India
प्रकाशित पुस्तकें :- फ़लसफ़ा -ए - ज़िंदगी ( ग़ज़ल संग्रह ) , एहसासों के फूल ( कविता संग्रह ) , हमारे वक़्त की अनुगूंज ( व्यंग्य रचना संग्रह ) , दास्तानें ज़िन्दगी ( कहानी संग्रह ) , शून्यकाल का आलाप ( हास्य-व्यंग्य रचना संग्रह )
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