Expressions by Dr Lok Setia ( डॉ लोक सेतिया का लेखन )

मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।

दिसंबर 30, 2012

POST : 270 और कुछ भी नहीं बंदगी हमारी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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और कुछ भी नहीं बंदगी हमारी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" और कुछ भी नहीं बंदगी हमारी बस सलामत रहे दोस्ती हमारी । ग़म किसी के ...

POST : 269 नहीं कभी रौशन नज़ारों की बात करते हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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      नहीं कभी रौशन नज़ारों की बात करते हैं ( ग़ज़ल )                            डॉ लोक सेतिया "तनहा" नहीं कभी रौशन नज़ारों की ...

POST : 268 प्यार की बात मुझसे वो करने लगा ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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        प्यार की बात मुझसे वो करने लगा ( ग़ज़ल )                            डॉ लोक सेतिया "तनहा" प्यार की बात मुझसे वो करने ल...
दिसंबर 29, 2012

POST : 267 बहाने अश्क जब बिसमिल आये ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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बहाने अश्क जब बिसमिल आये ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" बहाने अश्क जब बिसमिल आये  सभी कहने लगे पागल आये । हुई इंसाफ की बातें...
दिसंबर 28, 2012

POST : 266 हमको जीने के सब अधिकार दे दो ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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        हमको जीने के सब अधिकार दे दो ( ग़ज़ल )                           डॉ लोक सेतिया "तनहा" हमको जीने के सब अधिकार दे दो मर...

POST : 265 हमको मिली सौगात है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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 हमको मिली सौगात है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" हमको मिली सौगात है अश्कों की जो बरसात है । होती कभी थी चांदनी अब तो अंधेर...
दिसंबर 27, 2012

POST : 264 जब हुई दर्द से जान पहचान है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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 जब हुई दर्द से जान पहचान है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" जब हुई दर्द से जान पहचान है ज़िंदगी तब हुई कुछ तो आसान है । क़त्ल ह...
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दिसंबर 23, 2012

POST : 263 अलविदा पुरातन स्वागतम नव वर्ष ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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अलविदा पुरातन , स्वागतम नव वर्ष ( कविता ) डॉ  लोक सेतिया अलविदा पुरातन वर्ष ले जाओ साथ अपने बीते वर्ष की सभी कड़वी यादों को छोड़ जाना ...
दिसंबर 22, 2012

POST : 262 रुक नहीं सकता जिसे बहना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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रुक नहीं सकता जिसे बहना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" रुक नहीं सकता जिसे बहना है एक दरिया का यही कहना है । मान बैठे लोग ...
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POST : 261 उसको न करना परेशान ज़िंदगी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" ( REPEAT : 539 )

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 उसको न करना परेशान ज़िंदगी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" उसको न करना परेशान ज़िंदगी टूटे हुए जिसके अरमान ज़िंदगी । होने लगा प्...
दिसंबर 21, 2012

POST : 260 गए भूल हम ज़िन्दगानी की बातें ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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गए भूल हम ज़िन्दगानी की बातें ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" गए भूल हम ज़िन्दगानी की बातें सुनाते रहे बस कहानी की बातें । तराश...
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POST: 259 शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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         शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है ( ग़ज़ल )                           डॉ लोक सेतिया "तनहा" शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है...
दिसंबर 19, 2012

POST : 258 जिये जा रहे हैं इसी इक यकीं पर ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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जिये जा रहे हैं इसी इक यकीं पर ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" जिये जा रहे हैं इसी इक यकीं पर हमारा भी इक दोस्त होगा कहीं पर । ...
दिसंबर 14, 2012

POST : 257 दर्द को चुन लिया ज़िंदगी के लिये ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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दर्द को चुन लिया ज़िंदगी के लिये ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" दर्द को चुन लिया ज़िंदगी के लिये  और क्या चाहिये शायरी के लिये । ...
दिसंबर 06, 2012

POST : 256 सिलसिला हादिसा हो गया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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  सिलसिला हादिसा हो गया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" सिलसिला हादिसा हो गया झूठ सच से बड़ा हो गया । कश्तियां डूबने लग गई ना...

POST : 255 दर्द को गुज़रे ज़माने हैं बहुत ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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 दर्द को गुज़रे ज़माने हैं बहुत ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" दर्द को गुज़रे ज़माने हैं बहुत बेमुरव्वत दोस्ताने हैं बहुत । हो ग...
दिसंबर 05, 2012

POST : 254 मत ये पूछो कि क्या हो गया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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 मत ये पूछो कि क्या हो गया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" मत ये पूछो कि क्या हो गया बोलना सच ,  खता हो गया । जो कहा भाई को भा...
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POST : 253 कश्ती वही साहिल वही तूफ़ां वही हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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       कश्ती वही साहिल वही तूफ़ां वही हैं ( ग़ज़ल )                               डॉ लोक सेतिया "तनहा" कश्ती वही साहिल वही तूफा...

POST : 252 ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया

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 ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई ( नज़्म ) डॉ  लोक सेतिया  ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई तसव्वुर में आ आ के मुस्काये कोई । सराहूं...
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दिसंबर 03, 2012

POST : 251 बेवफ़ा हमको कह गये होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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बेवफ़ा हमको कह गये होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" बेवफ़ा हमको कह गये होते हम ये इल्ज़ाम सह गये होते । बहते मौजों के साथ पत्थ...
नवंबर 29, 2012

POST : 250 गांव अपना छोड़ कर हम पराये हो गये ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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      गांव अपना छोड़ कर हम पराये हो गये ( ग़ज़ल )                            डॉ लोक सेतिया "तनहा" गांव  अपना छोड़ कर , हम  पराये...
नवंबर 28, 2012

POST : 249 हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ये भी शिकवा कुछ अदीबों का है । मिल ...
नवंबर 25, 2012

POST : 248 किया था वादा तुमने कृष्ण ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    किया था वादा तुमने कृष्ण ( कविता ) डॉ लोक सेतिया  धरती पर बढ़ जाता है जब अधर्म उसका अंत करने को लेते हो तुम जन्म गीता में कहा था ...
नवंबर 23, 2012

POST : 247 हमने देखा है मिल कर सभी से ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

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हमने देखा है मिल कर सभी से  ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा ' हमने देखा है मिल कर सभी से  लोग लगते हमें अजनबी से । जो था पाया सभी खो ...
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नवंबर 22, 2012

POST : 246 वो साहित्य कहाँ है ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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      वो साहित्य कहां है ( कविता ) डॉ लोक सेतिया कब का मिट चुका लुट चुका जिसको चाहते हैं ढूंढना हम सब । उजड़ा उजड़ा सा है चमन मुरझाये ...
नवंबर 21, 2012

POST : 245 फूल पत्थर के ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    फूल पत्थर के ( कविता ) डॉ लोक सेतिया साहित्य में बड़ा है उनका नाम गरीबों के हमदर्द हैं कुछ ऐसी बनी हुई उनकी है पहचान । गरीब बेब...

POST : 244 अमर कहानी ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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अमर कहानी ( कविता ) डॉ लोक सेतिया बेहद कठिन है लिखना जीवन की कहानी नहीं आसान होता समझना जीवन को करते हैं  प्रतिदिन संग्राम जीने ...

POST : 243 फिर नये सिलसिले क्या हुए ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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फिर नये सिलसिले क्या हुए ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" फिर नये सिलसिले क्या हुए सब पुराने गिले क्या हुए । बीज बोये थे फूलों...

POST : 242 खुदा से बात ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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      खुदा से बात ( कविता ) डॉ लोक सेतिया कहते हैं लोग दुनिया में अच्छा-बुरा जो भी होता है सब होता है तेरी ही मर्ज़ी से । अन्याय अत्य...
नवंबर 20, 2012

POST : 241 ईमान अपना बेच कर कुछ करोड़ में ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

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ईमान अपना बेच कर कुछ करोड़ में ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया   ईमान अपना बेच कर , कुछ करोड़ में  शामिल हुए सब लोग इस भाग - दौड़ में ।      अच्छा - बुरा...
नवंबर 19, 2012

POST : 240 मेरी खबर ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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      मेरी खबर ( कविता ) डॉ लोक सेतिया पहचाना नहीं आज तुमने मुझे तुम्हें फुर्सत नहीं थी मिलने की करनी थी मुझको जो बातें तुमसे  रहेंगी ...

POST : 239 जो ख़ुदा हैं वही बस यहां रह रहे हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

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 जो ख़ुदा हैं वही बस यहां रह रहे हैं ( ग़ज़ल )                          डॉ लोक सेतिया ' तनहा ' जो ख़ुदा हैं वही बस यहां रह रहे हैं  ...
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POST : 238 मधुर सुर न जाने कहां खो गया है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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मधुर सुर न जाने कहां खो गया है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" मधुर सुर न जाने कहां खो गया है यही शोर क्यों हर तरफ हो गया है । ...
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नवंबर 18, 2012

POST : 237 मेरी जान , मेरे दोस्त ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    मेरी जान , मेरे दोस्त ( कविता ) डॉ लोक सेतिया  अक्सर आता है मुझे याद  पहला दिन कालेज का झाड़ियों के पीछे पत्थरों पर बैठे हुए थे ह...
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नवंबर 17, 2012

POST : 236 कोई ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    कोई ( कविता )    डॉ लोक सेतिया कोई है धड़कन दिल की कोई राहों की है धूल । कोई शाख से टूटा पत्ता कोई डाली पे खिला फूल । कोई आंसू ...
नवंबर 16, 2012

POST : 235 ऐसा भी कोई तो हो ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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      ऐसा भी कोई तो हो ( कविता ) डॉ लोक सेतिया अपना ले जो मुझे मैं जैसा भी हूं । हर दिन मुझको न करवाए एहसास मेरी कमियों का बार बार ...

POST : 234 बतायें तुम्हें क्या किया हमने ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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बतायें तुम्हें क्या किया हमने ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" बतायें तुम्हें क्या किया हमने ज़माने को ठुकरा दिया हमने । बुझी प...
नवंबर 15, 2012

POST : 233 रास्ते ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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     रास्ते ( कविता ) डॉ लोक सेतिया मंज़िल की जिन्हें चाह थी मिल गई उनको मंज़िल । मैं वो रास्ता हूं गुज़रते रहे जिससे हो कर  दुनिय...
नवंबर 14, 2012

POST : 232 हमारा अपना ताज ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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     हमारा अपना ताज ( कविता ) डॉ लोक सेतिया मुमताज क्या चाहती थी किसे पता उसे क्या मिला ताज बनने से । बनवा दिया एक राजा ने एक महल ...
नवंबर 13, 2012

POST : 231 मृगतृष्णा ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    मृगतृष्णा ( कविता ) डॉ लोक सेतिया हम चले जाते हैं उनके पास  निराशा और परेशानी में  सोचकर कि वे कर सकते हैं जो हो नहीं पाता है  कभ...
नवंबर 12, 2012

POST : 230 विवशता ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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        विवशता ( कविता ) डॉ लोक सेतिया  खाली है मेरा भी दामन तुम्हारे आंचल की तरह कुछ भी नहीं पास मेरे तुम्हें देने को । तुम्हारी त...

POST : 229 नहीं आफ़ताब चांद तारे नहीं हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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नहीं आफ़ताब चांद तारे नहीं हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" नहीं आफ़ताब चांद तारे नहीं हैं कहीं ढूंढते मगर सहारे नहीं हैं । ...
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POST : 228 इसी जहां में सभी का जहान होता है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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       इसी जहां में सभी का जहान होता है ( ग़ज़ल )                          डॉ लोक सेतिया "तनहा" इसी जहां में सभी का जहान होता...
नवंबर 11, 2012

POST : 227 काश ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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      काश ( कविता ) डॉ  लोक सेतिया  चले जाते हैं हम लोग मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे गिरजाघर । करते हैं पूजा अर्चना  सुन लेते हैं बातें धर...

POST : 226 न जाने ये कैसी नस्ल आ रही है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

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न जाने ये कैसी नस्ल आ रही है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा ' न जाने ये कैसी नसल , आ रही है  बिना बीज वाली फ़सल आ रही है ।    जहां स...
नवंबर 10, 2012

POST : 225 कहानी ज़ख़्मों की ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    कहानी ज़ख़्मों की ( कविता ) डॉ लोक सेतिया बार बार लिखता रहा हर बार मिटाता रहा कहानी अपने जीवन की । अच्छा है यही रह जाये अनकही सद...
नवंबर 09, 2012

POST : 224 सुगंध प्यार की ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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सुगंध प्यार की ( कविता ) डॉ लोक सेतिया सुनी हैं हीर रांझा कैस लैला की सबने कहानियां मैंने देखा है दो प्यार करने वालों को खुद अपनी न...
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पांच पुस्तकें प्रकाशित :- ग़ज़ल , कविता , कहानी , व्यंग्य , हास्य- व्यंग्य विधाओं की हुई हैं।

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Dr. Lok Setia
Fatehabad, Haryana, India
प्रकाशित पुस्तकें :- फ़लसफ़ा -ए - ज़िंदगी ( ग़ज़ल संग्रह ) , एहसासों के फूल ( कविता संग्रह ) , हमारे वक़्त की अनुगूंज ( व्यंग्य रचना संग्रह ) , दास्तानें ज़िन्दगी ( कहानी संग्रह ) , शून्यकाल का आलाप ( हास्य-व्यंग्य रचना संग्रह )
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