Expressions by Dr Lok Setia ( डॉ लोक सेतिया का लेखन )

मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।

सितंबर 30, 2016

POST : 525 अपमानित होती देश की जनता ( बेहद खेद की बात ) डॉ लोक सेतिया

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     अपमानित होती देश की जनता ( बेहद खेद की बात )                                    डॉ लोक सेतिया  यूं तो हमेशा से साधनविहीन लोगों को ...
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सितंबर 28, 2016

POST : 524 सार्थक जीवन या निरर्थक जीवन ( चिंतन ) डॉ लोक सेतिया

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      सार्थक जीवन या निरर्थक जीवन ( चिंतन )  डॉ लोक सेतिया        बहुत दिन से इक खलबली सी है दिलो-दिमाग़ में खुद अपने ही बारे में , मुझे क...
सितंबर 26, 2016

POST : 523 Part 4 हिलती हुई दीवारें ( मेरी चर्चित कहानी ) भाग चार { ऑनर किल्लिंग पर } डॉ लोक सेतिया

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       हिलती हुई दीवारें ( मेरी चर्चित कहानी ) भाग चार- अंतिम                               { ऑनर किल्लिंग पर } डॉ लोक सेतिया          ...
सितंबर 25, 2016

POST : 522 Part 3 हिलती हुई दीवारें ( मेरी चर्चित कहानी ) भाग तीसरा { ऑनर किल्लिंग पर } डॉ लोक सेतिया

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     हिलती हुई दीवारें ( मेरी चर्चित कहानी ) भाग तीसरा                              { ऑनर किल्लिंग पर } डॉ लोक सेतिया                   ...

POST : 521 Part 2 हिलती हुई दीवारें ( मेरी सब से लोकप्रिय कहानी ) भाग दूसरा { ऑनर किल्लिंग पर } डॉ लोक सेतिया

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  हिलती हुई दीवारें ( मेरी सब से लोकप्रिय कहानी ) भाग दूसरा                            { ऑनर किल्लिंग पर } डॉ लोक सेतिया               ...

POST : 520 Part 1 हिलती हुई दीवारें ( मेरी सब से लोकप्रिय कहानी ) भाग पहला { ऑनर किल्लिंग पर } डॉ लोक सेतिया

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    हिलती हुई दीवारें ( मेरी सब से लोकप्रिय कहानी )  भाग पहला                            { ऑनर किल्लिंग पर }  डॉ लोक सेतिया    भावना को...
सितंबर 23, 2016

POST : 519 कौन किसको समझे समझाये ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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कौन किसको समझे समझाये  ( कविता )  डॉ लोक सेतिया आखिर आज जान ही लिया मैंने बेकार है प्रयास करना भी । यूं ही अभी तलक मैंने घुट घुट क...
सितंबर 21, 2016

POST : 518 इक पाती अपने परमात्मा के नाम ( फरियाद ) डॉ लोक सेतिया

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 इक पाती अपने परमात्मा के नाम ( फरियाद ) डॉ लोक सेतिया          क्या संबोधन दूं  नहीं जानता , विनती कहूं या फरियाद नहीं मालूम ये भी , इत...
सितंबर 19, 2016

POST : 517 देखना अपने समाज को दर्पण के सामने ( कड़वा सच ) डॉ लोक सेतिया

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     देखना अपने समाज को दर्पण के सामने (  कड़वा सच )                                     डॉ लोक सेतिया      आप जब कुछ नहीं कर सकते तब परे...
सितंबर 14, 2016

POST : 516 इंतज़ार में है मंज़िल ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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 इंतज़ार में है मंज़िल ( कविता )   डॉ लोक सेतिया  कभी कभी सोचते हैं हम क्या खोया है क्या पाया है   क्या यही था हमारा ध्येय क्या यही थी ह...
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POST : 515 फिर वही ढंग हिंदी दिवस मनाने का ( बेबाक ) डॉ लोक सेतिया

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  फिर वही ढंग हिंदी दिवस मनाने का ( बेबाक ) डॉ लोक सेतिया                 आज इक  मित्र  का  फ़ोन आया  , कल आपके शहर में आ  रहे  हैं  इक कव...
जुलाई 08, 2016

POST : 514 कुछ भी ठीक नहीं है सरकार ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

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  कुछ भी ठीक नहीं है सरकार ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया                 भ्र्ष्टाचार की खबर नहीं होना ही काफी नहीं है , उसका नहीं होना साबित कि...
जुलाई 06, 2016

POST : 513 मेरा सुंदर सपना टूट गया ( कड़वा सच ) डॉ लोक सेतिया

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  मेरा सुंदर सपना टूट गया ( कड़वा सच ) डॉ लोक सेतिया                      दो साल हो गये हैं इंतज़ार करते करते , जनता को वो अच्छे दिन कहीं द...
जून 29, 2016

POST : 512 नया फैशन सरकार का ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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      नया फैशन सरकार का ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया                  सरकार का नया विज्ञापन आया है। ईमानदार सरकार का। अब ईमानदारी की सभी की अपन...
जून 13, 2016

POST : 511 ये किन लोगों की बात है ( मानवाधिकारों की बात ) डॉ लोक सेतिया

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 ये किन लोगों की बात है ( मानवाधिकारों की बात ) डॉ लोक सेतिया                   आज जैसे मेरे अंदर सोया हुआ कोई फिर से जाग गया । बहुत दिन स...
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जून 12, 2016

POST : 510 फिर से इक बार ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    फिर से इक बार ( कविता ) डॉ लोक सेतिया  हमारी आंखों पर बंधी हुई थी कोई पट्टी । और हम कोल्हू के बैल बन कर रात दिन चलते गये चलते गय...
जून 09, 2016

POST : 509 रास्ता अंधे सबको दिखा रहे ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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    रास्ता अंधे सबको दिखा रहे ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया                 बहुत शोर करते हैं वो जब भी उनको लगता है कोई उन्हें मनमानी नहीं करने...
जून 08, 2016

POST : 508 पापी पेट का सवाल है बाबा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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    पापी पेट का सवाल है बाबा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया                  इक विज्ञापन देख रहा हूं कुछ दिन से टीवी पर , कुछ बच्चे आते हैं इक बू...
मई 22, 2016

POST : 507 हैं कहां ऐसे भले लोग ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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        हैं कहां ऐसे भले लोग ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया           समझ नहीं आता सच क्या है बनावट क्या है। अभी देखा इक टीवी शो में भाई भाई से ब...
मई 08, 2016

POST : 506 मुझे सज़ा दे दो ( मंथन ) ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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    मुझे सज़ा दे दो ( मंथन ) कविता    डॉ लोक सेतिया कब से खड़ा हूं कटघरे में सुन रहा हूं इल्ज़ाम सभी के सर झुकाये खड़ा हुआ हूं  नहीं है को...
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अप्रैल 26, 2016

POST : 505 नेताजी क्यों रोये ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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          नेताजी क्यों रोये (  तरकश ) डॉ लोक सेतिया                ये क्या हुआ , कैसे हुआ , कब हुआ , ये ना पूछो । बस उनकी पलकें भरी सभा म...
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अप्रैल 17, 2016

POST : 504 तुझसे कि खुद अपने आप से ( गुज़ारिश ) डॉ लोक सेतिया

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गुज़ारिश तुझसे कि अपने आप से ( कविता ) डॉ लोक सेतिया सारी उम्र यही होता रहा मुझे क्या पता कौन करता रहा । हर कदम निराशा हताशा इक जंग क...
अप्रैल 16, 2016

POST : 503 अभी बाकी यही इक काम करना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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       अभी बाकी यही इक काम करना है ( ग़ज़ल )                           डॉ लोक सेतिया "तनहा" अभी बाकी यही इक काम करना है हमें ...
अप्रैल 11, 2016

POST : 502 भगवान की भी सुनो ( इक विचार ) डॉ लोक सेतिया

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      भगवान की भी सुनो ( इक विचार ) डॉ लोक सेतिया          इक मंदिर में हादसा हो गया , आग लगी और लोग जल कर मर गये , कितने ही तड़प रहे दर्द...
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अप्रैल 08, 2016

POST : 501 कहां तेरी हक़ीक़त जानते हम हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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कहां तेरी हक़ीक़त जानते हम हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" कहां तेरी हक़ीकत जानते हम हैं बिना समझे तुझे पर पूजते हम हैं । नही...
अप्रैल 03, 2016

POST : 500 आया बुलावा भगवान का ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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           आया बुलावा भगवान  का ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया संपादक जी के घर की कॉलबेल बजी , दरवाज़ा खोला तो देखा सामने बजरंग बली जी खड़े हैं ।...
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पांच पुस्तकें प्रकाशित :- ग़ज़ल , कविता , कहानी , व्यंग्य , हास्य- व्यंग्य विधाओं की हुई हैं।

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Dr. Lok Setia
Fatehabad, Haryana, India
प्रकाशित पुस्तकें :- फ़लसफ़ा -ए - ज़िंदगी ( ग़ज़ल संग्रह ) , एहसासों के फूल ( कविता संग्रह ) , हमारे वक़्त की अनुगूंज ( व्यंग्य रचना संग्रह ) , दास्तानें ज़िन्दगी ( कहानी संग्रह ) , शून्यकाल का आलाप ( हास्य-व्यंग्य रचना संग्रह )
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