Expressions by Dr Lok Setia ( डॉ लोक सेतिया का लेखन )

मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।

फ़रवरी 17, 2014

POST : 417 नकाब देवताओं की , पहनी है दानवों ने ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

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     नकाब  देवताओं की  पहनी है दानवों ने ( हास-परिहास )                                 डॉ लोक सेतिया कलयुग में होने लगी जब सत्य युग की...
फ़रवरी 16, 2014

POST : 416 खबर खबर वालों की ( मीडिया की बात ) डा लोक सेतिया

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    खबर खबर वालों की ( मीडिया की बात ) डा लोक सेतिया वो सच की बात कहने का दावा करते हैं। मगर सच क्या है ये वो भी जानते हैं। हर सच पूरा सच...
फ़रवरी 12, 2014

POST : 415 देवी देवताओं का बाज़ार ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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       देवी देवताओं का बाज़ार ( तरकश ) डा लोक सेतिया       बहुत ही विकट समस्या खड़ी हो गई है। चित्रगुप्त जी ने धर्मराज जी से साफ कह दिया ह...
फ़रवरी 11, 2014

POST : 414 नया मदारी , नया तमाशा ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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    नया  मदारी , नया तमाशा ( तरकश )  डा लोक सेतिया           राजनीती के खेल में इक नया मदारी आया है। उसने आकर बातों से सब को बहलाया है , ...
फ़रवरी 09, 2014

POST : 413 सपने देख कर खुश हो जाओ ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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    सपने देख कर खुश हो जाओ ( तरकश ) डा लोक सेतिया सर्वेक्षण करना कोई कठिन कार्य नहीं है। आप किसी भी विषय पर कर सकते हैं सर्वेक्षण। कोई बं...
फ़रवरी 05, 2014

POST : 412 खेलने में भी समझदारी ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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    खेलने में भी समझदारी ( तरकश ) डा लोक सेतिया कभी खेल खेल में बात बन जाती है और कभी बिना बात खेल बिगड़ भी जाता है। हुस्न वाले तो दिलों स...
फ़रवरी 04, 2014

POST : 411 गिरती हुई दीवार है , ठोकर मत लगाना ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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 गिरती हुई दीवार है , ठोकर मत लगाना ( तरकश ) डा लोक सेतिया         सुना था समझदार लोग बहुत ही खतरनाक होते हैं। अपनी साहूलियत के लिए सच को...
फ़रवरी 02, 2014

POST : 410 सबक ईमानदारी का ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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       सबक ईमानदारी का ( तरकश ) डा लोक सेतिया सबक पढ़ाने का अपना ही मज़ा है , पढ़ाने को खुद अमल करके नहीं दिखाना होता। स्कूलों में तो ऐसा भी...

POST : 409 नौ सौ चूहे खाकर बिळी हज को चली ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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  नौ सौ चूहे खाकर बिळी हज को चली ( तरकश ) डा लोक सेतिया        आज अपने प्रिय अख़बार में एक साक्षात्कार पढ़ा किसी दल के नेता का। सोचा इनकी बा...
जनवरी 31, 2014

POST : 408 नाखुदा खुद को बताने वाले ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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      नाखुदा खुद को बताने वाले  ( तरकश ) डा लोक सेतिया         एक जाने माने शायर का शेर याद आ रहा है। कौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम ...
जनवरी 26, 2014

POST : 407 दर्शन दो लोकतंत्र ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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         दर्शन दो लोकतंत्र ( तरकश ) डा लोक सेतिया             यही मंत्र है जिसका जाप सभी करते हैं। कोंग्रेस भा ज पा वामपंथी समाजवादी जनता ...
जनवरी 20, 2014

POST : 406 अब तो सारा जहां हमारा है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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 अब तो सारा जहां हमारा है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"   अब तो सारा जहां हमारा है  आपने  हमसफ़र पुकारा है ।    तुम ही पतवार तुम ही ...
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जनवरी 16, 2014

POST : 405 सवाल विशेषाधिकार का ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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   सवाल विशेषाधिकार का ( तरकश ) डा लोक सेतिया       यमराज जब पत्रकार की आत्मा को ले जाने लगे तब पत्रकार की आत्मा ने यमराज से कहा कि मैं ब...
जनवरी 15, 2014

POST : 404 नेता पति हैं , पत्नी है जनता ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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  नेता पति हैं , पत्नी है जनता ( तरकश ) डा लोक सेतिया ये सबक पढ़ाना बहुत ज़रूरी है। तुम औरत हो जनता हो , मैं पुरुष हूं राजनेता हूं। तुमने ...
जनवरी 14, 2014

POST : 403 चिराग़ अलादीन का ( हास-परिहास ) - डॉ लोक सेतिया

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   चिराग़ अलादीन का ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया हो सकता है कि वास्तव में अलादीन नाम का कोई शख्स इस दुनिया में कभी हुआ ही नहीं हो न ही कोई...
जनवरी 12, 2014

POST : 402 मुक्ति ( कहानी ) डा लोक सेतिया

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              मुक्ति ( कहानी ) डॉ लोक सेतिया                      पता नहीं किसे ये दुनिया जीने के काबिल लगती होगी , कौन ज़िंदगी को जीता है...
जनवरी 11, 2014

POST : 401 जो बिक गये , वही खरीदार हैं ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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   जो बिक गये , वही खरीदार हैं ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया कहानी एक वफादार कुत्ते की है। अपने गरीब मालिक की रूखी सूखी रोटी खा कर भी वो खुश रहत...
जनवरी 10, 2014

POST : 400 भ्र्ष्टाचार के अंत के बाद क्या होगा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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     भ्र्ष्टाचार के अंत के बाद क्या होगा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया              आखिर देश से भ्रष्टाचार का नामोनिशान मिट ही गया । अब सब जगह हर ...
1 टिप्पणी:
जनवरी 09, 2014

POST : 399 बड़ा जूता , ज़्यादा पालिश ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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    बड़ा जूता , ज़्यादा पालिश ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया  हमने बड़े अधिकारी से कहा " विभाग आपका बहुत ही बदनाम है। भ्रष्टाचार खुलेआम है , ब...
जनवरी 08, 2014

POST : 398 मृत्युलोक का सीधा प्रसारण ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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    मृत्युलोक का सीधा प्रसारण ( तरकश ) डा लोक सेतिया       यमराज उस परेशान आत्मा को लेकर सीधे धर्मराज जी की कचहरी में आये। चित्रगुप्त ने ...
जनवरी 07, 2014

POST : 397 कविता की बात ( हास-परिहास ) डा लोक सेतिया

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      कविता की बात ( हास-परिहास ) डा लोक सेतिया हमने पहले से ही तय कर लिया था कि अगर कभी भी हम प्यार करेंगे तो सिर्फ कविता से करेंगे। जब...
जनवरी 06, 2014

POST : 396 फ्रैंडली क्रिकेट मैच ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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       फ्रैंडली  क्रिकेट मैच ( तरकश ) डा लोक सेतिया        इस देश में हर किसी को एक काम करना बहुत अच्छी तरह आता है। क्रिकेट खेलना। नेता अ...
जनवरी 05, 2014

POST : 395 कब और कैसे बदलेगी तस्वीर देश की ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

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  कब और कैसे बदलेगी तस्वीर देश की ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया हक़ नहीं खैरात देने लगे , इक नई सौगात देने लगे। मेरी ये ग़ज़ल तब भी सच थी जब खाद्य ...
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पांच पुस्तकें प्रकाशित :- ग़ज़ल , कविता , कहानी , व्यंग्य , हास्य- व्यंग्य विधाओं की हुई हैं।

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Dr. Lok Setia
Fatehabad, Haryana, India
प्रकाशित पुस्तकें :- फ़लसफ़ा -ए - ज़िंदगी ( ग़ज़ल संग्रह ) , एहसासों के फूल ( कविता संग्रह ) , हमारे वक़्त की अनुगूंज ( व्यंग्य रचना संग्रह ) , दास्तानें ज़िन्दगी ( कहानी संग्रह ) , शून्यकाल का आलाप ( हास्य-व्यंग्य रचना संग्रह )
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