नवंबर 02, 2023

POST : 1736 हम बिक गये ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया

              हम बिक गये ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया  

दिल के हाथों सरे - आम हम बिक गये 
इस मुहब्बत में , बेदाम हम बिक गये । 
 
भूल से आ गए , मयकदे में कभी 
पी के हाथों तिरे , जाम , हम बिक गये ।
 
आये बन कर , ख़रीदार बाज़ार में 
और ले कर तिरा नाम हम बिक गये । 
 
तेरे ज़ुल्मों - सितम को भी , मेरे सनम 
जान कर तेरा इनाम , हम बिक गये ।
 
आप अपना जनाज़ा उठाये हुए 
हो के मज़बूर हर शाम हम बिक गये । 
 
कुछ नहीं मोल , बाज़ार में आपका 
जब लगाया ये इल्ज़ाम हम बिक गये । 
 
सब ही ' तनहा ' पशेमान रहने लगे 
उनको मिल जाये आराम हम बिक गये ।   

      
 


 
 

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