अगस्त 22, 2012

POST : 65 दिल में आता है सताएं उनको ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

दिल में आता है सताएं  उनको ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया  ' तनहा '

दिल में आता है सताएं उनको
बात ये कैसे बताएं उनको ।

एक मुद्दत हुई दीदार किये
किस बहाने से बुलाएं उनको ।

वो तो हर बात पे हंस देते हैं
कभी रूठें तो मनाएं उनको ।

ये सितम हमसे न होगा हर्गिज़
कि शबे हिज्र रुलाएं उनको ।

हमने पूछा था सवाल उनसे कभी
याद वो कैसे दिलाएं उनको ।

खुद ग़ज़ल हैं वो हमारे दिल की
क्या हम अब और सुनाएं उनको । 
 
एक हसरत है हमारी  ' तनहा '
अपने सीने से लगाएं उनको । 
 

 
 
 




 

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