अक्टूबर 30, 2023

POST : 1732 फिर से कोई मुलाक़ात तो हो ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया

          फिर से कोई मुलाक़ात तो हो  ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया  

फिर से कोई मुलाक़ात तो हो 
ख़ामोशी में भी कुछ बात तो हो । 
 
बिजलियां हैं , घटाएं भी काली   
ख़ूब जम कर के बरसात तो हो । 
 
हिज्र की रात , होती है लंबी  
अब कभी चांदनी  रात तो हो । 
 
बात मौसम की हो अजनबी से 
फिर नई इक शुरुआत तो हो ।
 
कल सुबह बात कुछ और होगी 
ख़त्म बस आज की रात तो हो ।  
 
दिल ये अपना अमानत है उनकी  
दिल में उनके भी जज़्बात तो हो ।  
 
रूठ जाते जो ' तनहा ' मनाते 
कुछ , मनाने के हालात तो हो ।  
 
 
                          
 

 

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