अगस्त 09, 2012

POST : 27 फैसले तब सही नहीं होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

फैसले तब सही नहीं होते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

फैसले तब सही नहीं होते
बेखता जब बरी नहीं होते ।

जो नज़र आते हैं सबूत हमें
दर हकीकत वही नहीं होते ।

गुज़रे जिन मंज़रों से हम अक्सर
सबके उन जैसे ही नहीं होते ।

क्या किया और क्यों किया हमने
क्या गलत हम कभी नहीं होते ।

हमको कोई नहीं है ग़म  इसका
कह के सच हम दुखी नहीं होते ।

सोच लें , लिखने से ये पहले हम 

फैसले आखिरी नहीं होते ।

जो न इंसाफ दे सकें ' तनहा '
पंच वो , पंच ही नहीं होते ।
 
 
 
Prosecutors in a criminal justice system - iPleaders


 


 

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