Expressions by Dr Lok Setia ( डॉ लोक सेतिया का लेखन )

मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।

अगस्त 18, 2018

POST : 876 मौत का सोग भी होता है त्यौहार सा ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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   मौत का सोग भी होता है त्यौहार सा ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया   मैंने देखना भी उचित नहीं समझा मुझे मेरी धर्मपत्नी ने बताया जिनको आप बड़े चा...
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अगस्त 17, 2018

POST : 875 लाख चिराग़ जलाओगे रौशनी के लिये ( अटल बिहारी वाजपेयी की याद ) डॉ लोक सेतिया

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            लाख चिराग़ जलाओगे रौशनी के लिये                    ( अटल बिहारी वाजपेयी की याद )                                    डॉ लोक ...
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अगस्त 16, 2018

POST : 874 जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( किसान की बात ) भाग 12

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जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( किसान की बात ) भाग  12                                                  डॉ लोक सेतिया         1...
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अगस्त 15, 2018

POST : 873 15 अगस्त पर संबोधन का सफर ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

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   15 अगस्त पर संबोधन का सफर ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया        आज उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है । आज घर दुकान बाज़ार तो क्या सार्वजनिक स...
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POST : 872 मैं लालकिला बोल रहा हूं ( व्यथा-कथा ) डॉ लोक सेतिया

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    मैं लालकिला बोल रहा हूं ( व्यथा-कथा ) डॉ लोक सेतिया          मुझे जानते हो क्या , मुझे पहचानते हो क्या । मेरी कहानी सुनोगे क्या मेरा...
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अगस्त 13, 2018

POST : 871 चौकीदारों का एक समान वेतन और रैंक ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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 चौकीदारों का एक समान वेतन और रैंक ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया           आपको फिर से याद दिलवाता हूं देश में गधों के भी अधिकार हैं। कवि लोग त...
अगस्त 12, 2018

POST : 870 क़व्वाली युग की सरकार ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

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    क़व्वाली युग की सरकार ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया       कभी फिल्मों में क़व्वाली की धूम हुआ करती थी , अभी भी लोग झूमते हैं , पर्दा है ...
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अगस्त 11, 2018

POST : 869 मेरा सुंदर सपना टूट गया ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

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      मेरा सुंदर सपना टूट गया ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया            कुछ लोग समझते हैं हम जैसे लिखने वाले आलोचना करने के आदी हैं और हमें हर न...

POST : 868 रूह भटक रही है ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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        रूह भटक रही है ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया         सब उसकी तस्वीर के सामने हाथ जोड़ फूल चढ़ा रहे हैं।  अफ़सोस जता रहे हैं। भगवान इसकी...
अगस्त 10, 2018

POST : 867 भीख भिखारी और भिक्षा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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       भीख भिखारी और भिक्षा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया        भीख की महिमा , भिखारी सारी दुनिया , मोबाइल वाले भिखारी , भिक्षा सरचार्ज , ये स...
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अगस्त 09, 2018

POST : 866 जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग 11 - डॉ लोक सेतिया

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जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग-11                                               डॉ लोक सेतिया       आज रात ...

POST : 865 जिएं तो जिएं कैसे ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

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         जिएं तो जिएं कैसे ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया        जीने को कुछ बातें ज़रूरी हैं । महात्मा विदुर बताते हैं , स्वास्थ्य तन मन , अपनी...
अगस्त 06, 2018

POST : 864 जिन्हें लेना ही आता है ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

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        जिन्हें लेना ही आता है  ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया            माफ़ करें आज का विषय महिला पुरुष की समानता की बात पर नहीं है इसलिए उस...
अगस्त 04, 2018

POST : 863 जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग - 10 डॉ लोक सेतिया

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जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग -10                                       डॉ लोक सेतिया       3 अगस्त की कहा...
अगस्त 03, 2018

POST : 862 तेरी सुबह कह रही है ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

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             तेरी सुबह कह रही है  ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया        मैं गरीबों की बात करता हूं अमीरों के साथ करता हूं । तुम रात को दिन सम...
अगस्त 02, 2018

POST : 861 जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग - 9 डॉ लोक सेतिया

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जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग - 9                                        डॉ लोक सेतिया       आज की कहानी ...
अगस्त 01, 2018

POST : 860 जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग - 8 डॉ लोक सेतिया

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 जीवन के दोराहे पे खड़े सोचते हैं हम ( टीवी शो की बात ) भाग - 8                                              डॉ लोक सेतिया          आज ...
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पांच पुस्तकें प्रकाशित :- ग़ज़ल , कविता , कहानी , व्यंग्य , हास्य- व्यंग्य विधाओं की हुई हैं।

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Dr. Lok Setia
Fatehabad, Haryana, India
प्रकाशित पुस्तकें :- फ़लसफ़ा -ए - ज़िंदगी ( ग़ज़ल संग्रह ) , एहसासों के फूल ( कविता संग्रह ) , हमारे वक़्त की अनुगूंज ( व्यंग्य रचना संग्रह ) , दास्तानें ज़िन्दगी ( कहानी संग्रह ) , शून्यकाल का आलाप ( हास्य-व्यंग्य रचना संग्रह )
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