Expressions by Dr Lok Setia ( डॉ लोक सेतिया का लेखन )

मेरे ब्लॉग पर मेरी ग़ज़ल कविताएं नज़्म पंजीकरण आधीन कॉपी राइट मेरे नाम सुरक्षित हैं बिना अनुमति उपयोग करना अनुचित व अपराध होगा । मैं डॉ लोक सेतिया लिखना मेरे लिए ईबादत की तरह है । ग़ज़ल मेरी चाहत है कविता नज़्म मेरे एहसास हैं। कहानियां ज़िंदगी का फ़लसफ़ा हैं । व्यंग्य रचनाएं सामाजिक सरोकार की ज़रूरत है । मेरे आलेख मेरे विचार मेरी पहचान हैं । साहित्य की सभी विधाएं मुझे पूर्ण करती हैं किसी भी एक विधा से मेरा परिचय पूरा नहीं हो सकता है । व्यंग्य और ग़ज़ल दोनों मेरा हिस्सा हैं ।

जनवरी 23, 2015

POST : 474 बदलाव की बातें नहीं बदलाव चाहिए ( आलेख ) डा लोक सेतिया

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 बदलाव की बातें नहीं बदलाव चाहिए ( आलेख ) डा लोक सेतिया     चलो इक पुरानी कथा याद करते हैं , इक महात्मा जी ( सच्चे , आजकल जैसे नहीं ) किसी...
जनवरी 08, 2015

POST : 473 की मैं झूठ बोलिया ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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       की मैं झूठ बोलिया ( तरकश ) डा लोक सेतिया बहुत बातें हैं मन में कई दिन से , समझ नहीं पा रहा कि कैसे लिखूं । व्यंग्य की बात नहीं है ...
दिसंबर 25, 2014

POST : 472 नेताओं और मीडिया वालों का शोर ( आलेख ) डा लोक सेतिया

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  नेताओं और मीडिया वालों का शोर ( आलेख ) डा लोक सेतिया     समझना होगा सच क्या है , वो जो टीवी पर अख़बारों में परोसा जा रहा है अथवा वो जो हम...
दिसंबर 08, 2014

POST : 471 रिश्तों की डोरी ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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   रिश्तों की डोरी ( कविता ) डॉ  लोक सेतिया  कभी देखा है धागे जब उलझ जाते हैं बहुत कठिन हो जाता है उनको बचाकर अलग करना ज़रा सा खींचा क...
दिसंबर 01, 2014

POST : 470 खोखले लोगों का धर्म ( आलेख ) डा लोक सेतिया

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      खोखले लोगों का धर्म ( आलेख ) डा लोक सेतिया            कभी कभी हैरानी होती है कि क्या लोग सच में नहीं देख पाते कि जहां वो धर्म या सम...
नवंबर 26, 2014

POST : 469 लोग बड़े बड़े मकसद वाले ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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   लोग बड़े बड़े मकसद वाले ( तरकश ) डा लोक सेतिया           कलयुग की बात है , दिन में अंधेरी रात है। देखो धर्म बिकता है , इक डाल है दूजा हर...
नवंबर 24, 2014

POST : 468 कैद ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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 कैद ( कविता ) डॉ लोक सेतिया  जाने कब से बंद थे हम खुद अपनी ही कैद में छटपटाते रहे अब तक रिहाई के लिये हर दिन किया ही नहीं हमने कभी ...
नवंबर 20, 2014

POST : 467 वी आई पी अपराधी , आम अपराधी ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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  वी आई पी अपराधी , आम अपराधी ( तरकश ) डा लोक सेतिया          अपराध वही होता है अपराधी अलग अलग होते हैं । सरकार हो चाहे लोग ये देख कर आच...
1 टिप्पणी:
नवंबर 19, 2014

POST : 466 भारत का आईना ( तरकश ) डा लोक सेतिया

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       भारत का आईना ( तरकश ) डा लोक सेतिया           ये कुछ अलग है , मोदी मोदी का शोर विदेशों में खूब मचा हुआ है। एन आर आई भारतीय देश का...
नवंबर 14, 2014

POST : 465 इस बदलाव का सच ( ये ज़रूर पढ़ना ) डा लोक सेतिया

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    इस बदलाव का सच ( ये ज़रूर पढ़ना ) डा लोक सेतिया                 टीवी पर हर समाचार चैनेल पर धूम मची है , मोदी जी का डंका विदेश में बजने...
नवंबर 12, 2014

POST : 464 कब तक तमाशाओं से बहलाएंगे देश को ( सवाल - तरकश ) डा लोक सेतिया

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    कब तक तमाशाओं से बहलाएंगे देश को ( सवाल - तरकश )                                        डा लोक सेतिया               भाजपा को लगता ...
नवंबर 10, 2014

POST : 463 नेहरू से लेकर मोदी तक ( इंडिया का कड़वा सच ) डा लोक सेतिया

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 नेहरू से लेकर मोदी तक ( इंडिया का कड़वा सच ) डा लोक सेतिया                     देश को आज़ाद हुए सतसठ वर्ष हो गये मगर अभी भी कहने को विकास ...
नवंबर 03, 2014

POST : 462 दो आज़ाद पंछी गगन के ( कहानी ) डा लोक सेतिया

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     दो आज़ाद पंछी गगन के ( कहानी ) डा लोक सेतिया              महानगर के बस अड्डे पर अचानक प्रेम व प्रीति की मुलाकात हो गई। सालों बाद इस प...
नवंबर 01, 2014

POST : 461 सुन लिया , आपने जो कहा , कह दिया ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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      सुन लिया , आपने जो कहा , कह दिया ( ग़ज़ल )                       डॉ लोक सेतिया "तनहा" सुन लिया, आपने जो कहा, कह दिया  ...
अक्टूबर 31, 2014

POST : 460 क्या सच में कुछ बदल रहा है ( आलेख ) डा लोक सेतिया

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   क्या सच में कुछ बदल रहा है ( आलेख ) डा लोक सेतिया         कई दिन के बाद लिखने को आया हूं ब्लॉग पर। सच कहूं तो खुद निजि बातों में खोया...
अक्टूबर 16, 2014

POST : 459 ज़माने को बदलना है , नई दुनिया बसाना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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      ज़माने को बदलना है , नई दुनिया बसाना है ( ग़ज़ल )                          डॉ लोक सेतिया "तनहा" ज़माने को बदलना है , नई दु...
2 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 10, 2014

POST : 458 सच हुए सपने ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

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सच हुए सपने ( कविता ) डॉ लोक सेतिया सपने तो सपने होते हैं देखते हैं सभी सपने मैंने भी देखे थे कुछ प्यार वाले सपने । कोई अपना हो हमर...
अक्टूबर 06, 2014

POST : 457 रसीली ( कहानी , इक वेश्या की ) डा लोक सेतिया ( भाग दो )

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      रसीली ( कहानी , इक वेश्या की ) डा लोक सेतिया ( भाग दो )                         ( अब आगे कहानी का दूसरा और अंतिम भाग )          ...
अक्टूबर 03, 2014

POST : 456 कब होंगे सब लोग समान , मोदी जी ? ( आलेख ) डा लोक सेतिया

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 कब होंगे सब लोग समान , मोदी जी ? ( आलेख ) डा लोक सेतिया               आज बहुत दिन बाद कुछ कहने लगा हूं जो शायद कितनी बार दोहरा चुका हूं।...
अक्टूबर 01, 2014

POST : 455 अब यही ज़िंदगी अब यही बंदगी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

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अब यही ज़िंदगी अब यही बंदगी ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" अब यही ज़िंदगी , अब यही बंदगी प्यार की जब हमें भा गई बेखुदी । आपके व...
1 टिप्पणी:
सितंबर 26, 2014

POST : 454 एक नीति कथा ( न्याय ) डॉ लोक सेतिया

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          एक नीति कथा ( न्याय ) डॉ लोक सेतिया कोई राजा था जिसका न्याय बिलकुल सही माना जाता था। एक बार एक साथ तीन लोग एक ही अपराध करते...
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पांच पुस्तकें प्रकाशित :- ग़ज़ल , कविता , कहानी , व्यंग्य , हास्य- व्यंग्य विधाओं की हुई हैं।

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Dr. Lok Setia
Fatehabad, Haryana, India
प्रकाशित पुस्तकें :- फ़लसफ़ा -ए - ज़िंदगी ( ग़ज़ल संग्रह ) , एहसासों के फूल ( कविता संग्रह ) , हमारे वक़्त की अनुगूंज ( व्यंग्य रचना संग्रह ) , दास्तानें ज़िन्दगी ( कहानी संग्रह ) , शून्यकाल का आलाप ( हास्य-व्यंग्य रचना संग्रह )
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