अक्टूबर 12, 2026

POST : 2129 चिड़िया चुग गई खेत ( हास्य व्यंग्य कविता ) डॉ लोक सेतिया

        चिड़िया चुग गई खेत ( हास्य व्यंग्य कविता ) डॉ लोक सेतिया  

खाये आम ख़ुद पर हैं बबूल बोये  
समझते काम अच्छा कबीरा रोये  
जनाज़ा लोकतंत्र का निकाल रहे 
नशे में चूर हैं लगते हैं खोये खोये । 
 
बजाओ ताली कहता हर मदारी 
भुलाने को दुःख दर्द जितने ढोये 
घूंघट हटा कर के नाचना झूमना है 
नंगे हम्माम में हैं लाज शर्म धोये ।  
 
उसूलों पर जिए लोग सब मर गए  
उनका नाम लेकर हैं लोग तर गए  
पाबंदी सरकारी दिल्ली मत आना 
कितने बेगुनाह हैं जेलों में भर गए ।  
 
जनता ख़ामोश रहना बोलना मत 
सुनकर आवाज़ शासक भी डर गए 
खेलते रहे सभी मिल चोर सिपाही 
लुटेरे आये काम अपना वो कर गए । 
 
साहूकारों को दिया सब कुछ जब बेच 
पछताए से क्या चिड़िया चुग गई खेत ।  
 

 
 
 
 
 
 
 

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