अगस्त 02, 2026

POST : 2099 अभी तलक दोस्त ढूंढता हूं ( मेरी चाहत ) डॉ लोक सेतिया

   अभी तलक दोस्त ढूंढता हूं ( मेरी चाहत ) डॉ लोक सेतिया  

जैसा कि मैंने हमेशा ही बताया है मैंने लिखना शुरू ही दोस्त की तलाश में किया था , मेरी ज़िंदगी दोस्ती के नाम है और जितना भी लिखा पिछले पचास वर्ष में उस इक गुमनाम अनजान दोस्त को समर्पित है जो मेरा यकीन है मौत से पहले किसी दिन मिलेगा अवश्य मुझे ।  उस दोस्ती उस अपनेपन की मेरी प्यास का कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है दुनिया के अथाह सागर से बस इक बूंद काफ़ी है जो सिर्फ मुझे हासिल हो मेरी प्यास बुझा सकती हो । आपको काल्पनिक असंभव बात लगती होगी क्योंकि आपने दोस्ती का अर्थ गहराई से समझा ही नहीं होगा । इक छोटी सी कहानी पढ़ी थी कि कोई निकला एक दोस्त और उस भगवान की तलाश में तो रास्ते में उसको दोस्त मिल गया , उसके बाद उसको भगवान की आवश्यकता ही नहीं रही । मिला है कभी आपको कोई ऐसा दोस्त जो भगवान से बढ़कर हो , भगवान की भी कितनी शर्तें होती हैं मनाने अपना बनाने की मगर दोस्ती में कोई शर्त नहीं कोई अनुबंध नहीं कोई हिसाब किताब नहीं । दोस्त से कभी कुछ मांगना ही नहीं पड़ता है दोस्ती में आनंद मिलता है देकर अपना सभी कुछ बगैर किसी चाहत के पाने की कुछ भी बदले में । आपने जितनी बातें पढ़ी सुनी होंगी सुदामा कृष्ण जैसी उन में कुछ देना कुछ पाना हुआ होगा जो समानता का अनुभव नहीं करवाता है जबकि सच्ची दोस्ती में बराबर होते हैं जिसका जितना भी है दोस्त का खुद का अपना ही है मांगने की आवश्यकता कभी नहीं पड़ती है । कभी किसी दोस्त के घर पर दीवार पर टंगी हुई थी इक शीशे में जड़ी हुई उद्धरण की बात , दोस्त के घर को जाती सड़क कभी लंबी नहीं होती है , चले आओ । 
 
ऐसा बिल्कुल नहीं कि मैंने दोस्त बनाये नहीं या मैंने कभी दोस्ती नहीं की , बचपन के स्कूल से कॉलेज और उसके बाद तमाम शहरों गांवों में मुझे कितने ही लोग मिलते रहे दोस्त बनाये मैंने । मैंने तो अनगिनत ऐसे भी लोग दोस्त बनाये हमेशा जिन से कभी मिलना हुआ ही नहीं कोई मिलने का बिछुड़ने का अवसर तक नहीं था । ऐसे कितने दोस्त हैं अभी भी और रहेंगे जीवन भर की बात नहीं है मैंने अपने दोस्तों के दुनिया से अलविदा कहने के बाद भी उनकी जगह रखी है दिल दिमाग़ दोनों जगह ही । सभी कुछ न कुछ अलग अपना ख़ास संकल्प बनाते रहते हैं , मेरी चाहत है कहीं किसी जगह ऐसा एक घर बनाया जाये जिस में रहने वाले सिर्फ दोस्ती की हसरत रखते हों । कोई जाति धर्म अमीर गरीब कोई भेदभाव नहीं केवल पावन प्रेम दोस्ती का रत्ती भर भी छल कपट दिखावा नहीं । अपनी ऐसी दुनिया बसाना जिस में कोई भी पराया नहीं हो ।  
 
हर किसी ने समझाया कि ऐसी कोई दुनिया कहीं भी नहीं है कोई भी बिना मतलब रिश्ते नाते नहीं निभाता है आप इक मृगतृष्णा की बात करते हैं ।  लेकिन मैंने कभी ऐसी बातों से निराश होकर अपना संकल्प छोड़ा नहीं है , भरोसा है कोई मुझ जैसा मेरी ही तलाश में रहता है हमेशा । आखिर में इक कविता इक नज़्म से विषय को विराम देते हैं , अंत कभी नहीं होता इस चर्चा का जीवन में। 
 
 

       वो जहां ( कविता ) 

देखी है हमने तो
बस एक ही दुनिया
हर कोई है स्वार्थी जहां 
नहीं है कोई भी
अपना किसी का ।

माँ-बाप भाई-बहन
दोस्त-रिश्तेदार
करते हैं प्रतिदिन
रिश्तों का बस व्यौपार ।

कुछ दे कर कुछ पाना भी है
है यही अब रिश्तों का आधार ।

तुम जाने किस जहां की
करते हो बातें
लगता है मुझे जैसे 
देखा है शायद 
तुमने कोई स्वप्न 
और खो गये हो तुम । 
 

 

ये सबने कहा अपना नहीं कोई ( नज़्म ) 

ये सबने कहा अपना नहीं कोई
फिर भी कुछ दोस्त बनाए हमने ।

फूल उनको समझ कर चले कांटों पर
ज़ख्म ऐसे भी कभी खाए हमने ।

यूं तो नग्में थे मुहब्बत के भी
ग़म के नग्मात ही गाए हमने ।

रोये हैं वो हाल हमारा सुनकर
जिनसे दुःख दर्द छिपाए  हमने ।

ऐसा इक बार नहीं , हुआ सौ बार
खुद ही भेजे ख़त पाए  हमने ।

उसने ही रोज़ लगाई ठोकर 
जिस जिस के नाज़ उठाए हमने । 

हम फिर भी रहे जहां में "तनहा"
मेले कई बार लगाए  हमने । 
 
 
 Road House Quotes. QuotesGram
 

1 टिप्पणी:

  1. सच्चे दोस्त और दोस्ती की तलाश ....बढ़िया आलेख पहले के दोस्तो का भी स्मरण...सुंदर पंक्तियां👍👌

    जवाब देंहटाएं