ये क्या हुआ कैसे हुआ ( हास - परिहास ) डॉ लोक सेतिया
कितना भरोसा था भगवान का बहुत चर्चा थी पांच सौ साल बाद भगवान को लाया गया है भगवान राम जी का भव्य मंदिर बनवाया गया है । दान चंदा को लेकर शंका हुई तो मालूम पड़ा दर्शन को आने वाले लोगों में बड़ी कमी आई है , अचरज की बात नहीं है लोग वहां चंदे का हिसाब देखने को तो आते नहीं थे । मंदिर वही है उसमें स्थापित मूर्ति भी उसी जगह है आने वालों को दर्शन भी उसी ढंग से हो रहे हैं फिर संशय संकोच किस बात का है । सब भगवान की मर्ज़ी से होता है तो चंदे का हिसाब किताब भी भगवान से छुपा तो नहीं है , क्या किसी ने बताया कि ऐसी बात से नाराज़ हो कर भगवान मंदिर को छोड़ किसी और जगह चले गए हैं । अगर आपको भगवान के दर्शन करने हैं तो इस मायाजाल से बाहर निकलना होगा । पिछले दिनों इक ख़ास पहचान के अपने भाई भारत आये थे आजकल अमेरिका में रहते हैं , उत्साहित थे बता रहे थे अमेरिका का पॉसपोर्ट होने से पूरी मंडली को वी आई पी दर्शन करवाए गए । कुछ भी बदला नहीं है आपको समझने में भूल हुई है भगवान हैं या नहीं हैं ये दर्शन को आने वाले की आस्था पर निर्भर है । जिनको मिलना है भगवान हर जगह मिल ही जाते हैं जिनको शानदार भवन ईमारत और भव्य नज़ारों को देखना है उनके लिए कितनी और जगह मिल जाती हैं । सभी राहें अपनी जगह रहती हैं कभी नहीं चलती आहटें गुज़रती हैं आती जाती हैं । भगवान के घर सभी का स्वागत है लेकिन अचरज इस बात का है कि लोग यहां भी कुछ ख़ास शर्तें रखना चाहते हैं । कभी किसी को भगवान ने नहीं कहा होगा कि मुझे कोई आलीशान घर बनवा कर दो रहने को , ऊपरवाले को नीचे धरती पर किसी ठौर ठिकाने की ज़रूरत शायद ही हो सकती है । मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी को कोई भी धार्मिक स्थल कोई ईमारत कोई ढांचा किसी नाम का तोड़कर गिराकर अपना आवास बनाना स्वीकार हो ही नहीं सकता है ।
जिन्होंने राम को लेकर अपनी राजनीति की मंज़िल की ऊंचाई हासिल करनी थी उन्होंने जिस मंदिर को बनवाया वो उनकी मालकियत समझी जानी चाहिए और मालूम करते तो समझ आता की किस किस दस्तावेज़ पर कोई कौन असली मालिक भी है ख़रीदार भी और विक्रय का अधिकारी भी वही है । भगवान राम ने कभी कोई दावा नहीं किया न ही समझते हैं उनकी बनाई दुनिया में कोई ज़मीन तो क्या हवा पानी धूप छाया पर किसी का अधिकार नहीं लिखा कानूनी भाषा में सभी बेनामी कहला सकते हैं , बेनामी आमदनी जायदाद पर विवाद कुछ लोगों का आपसी झगड़ा होता है । हर किसी को बीच में हस्ताक्षेप की आवश्यकता नहीं होती है । चिंता इस बात की होनी चाहिए कि भगवान का नाम भी किसी ऐसी बात में लाना अनुचित है , भगवान का नाम बदनाम न करो । सोचा कि जब वास्तविक भगवान को इन सभी बातों की खबर मिली होगी तब उन पर क्या बीती होगी । किसी अन्य ईश्वर देवी देवता ने ताना भी मारा होगा कि इतनी जल्दी आपकी अहमियत घटने लगी है हमारी कितने सालों से बढ़ती बढ़ती ऐसी हो चुकी है कि सरकार को अंकुश लगाना पड़ा है जबकि आपके मंदिर आने को कितनी सुविधाएं क्या क्या नहीं किया गया । आपका कुछ नहीं होना लेकिन जिन्होंने आपको लाकर खड़ा किया बनाने को क्या क्या नहीं किया कोई तरीका नहीं छोड़ा सही या गलत जैसे भी हो करिश्मा कर दिखाया भगवान को लाने का अन्यथा सभी को भगवान लाते हैं दुनिया में उनकी गंगा कैसे बहेगी चिंता उनकी है । आपके सहारे जो थे उनका कोई और सहारा दोबारा मिलेगा कहीं किसी तरह अन्यथा उनकी नैया कैसे पार लगेगी भविष्य में उनको कितना कुछ खुद अपने लिए करना है आपके नाम पर । आपका नाम लिखने से पत्थर भी तैरने लगे थे उनके डूबने पर सवाल आपकी अनुकंपा पर भी खड़ा हो सकता है ।
दान चोरी की घटना पर बढ़िया प्रश्न पूछता आलेख👌👍
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