Monday, 12 November 2018

सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

  सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया 

   सोचने की आज़ादी भी है और सोचने से जाता भी कुछ नहीं है। आप जो सोच रहे मुझे उस की बात नहीं करनी है जो मैं सोच रहा हूं केवल उसी की बात होगी। सोचना बहुत ज़रूरी है दादाजी कहते थे पहले सोचो फिर उसको तोलो तभी बात को बोलो। बॉबी फिल्म का गीत सोचो कभी ऐसा हो क्या हो आज भी आशिक़ सोचते हैं काश ऐसा हो। बस हम दोनों अकेले बंद कमरे में रोटी पानी नहीं बस मुहब्बत की बातें मगर अब संभलना मीटू का खतरा है। यहां बात जन्म भुमि की है अदालत को निर्णय दे देना चाहिए जिसकी जो भी जन्म भुमि है उस पर उसका अधिकार है और सदियों तक रहेगा। एक बार फिर से सभी को अपने आधार कार्ड पर जन्म स्थान भी शामिल करवाना होगा ताकि जब भी कोई चाहे अपनी जन्म भुमि पर अपना हक हासिल कर सके। कानून लाना है तो सबके लिए लागू करना होगा। कितने लोग हैं जिनके पास घर नहीं है उनको वो जगह मिल जाएगी जिस जगह जन्म लिया था। बेशक मकान किराये का हो जन्म लेने वाला हिस्सेदार बन जाएगा उस घर में पैदा होते ही। अस्पताल में जन्म हुआ तो सभी वहां जन्म लेने वाले शेयर होल्डर की हैसियत वाले बन जाएंगे और अस्पताल से निशुल्क ईलाज ही नहीं कमाई का डिवीडंड भी पाएंगे। सरकारी घर में जन्म लेने वाले बच्चे खुद ब खुद सरकारी नौकरी पाएंगे। लावारिस बच्चे फुटपाथ पर हक जमाएंगे और झूमेंगे गाएंगे मौज मनाएंगे। 
                                       किसका जन्म कब कहां हुआ भगवान की मर्ज़ी है और भगवान से जो जगह मिली इंसान छीन नहीं सकता न ही जन्म भुमि की कोई कीमत रखी जा सकती है। मेरा जन्म जिस शहर में हुआ था कुछ साल पहले उस नगर जाना हुआ था और उस गली को जाकर देखा भी था। अब एक बार आधार कार्ड में सबूत सहित उस जगह का नक्शा साथ होगा तो जाकर फिर से पांव रखूंगा। अदालती आदेश साथ लेकर जाना है कोई दंगा फसाद नहीं प्यार से सद्भावना से आपसदारी से। कई देश बाहर से आये विदेशी नागरिक की अपने देश में जन्म लेने वाली संतान को नागरिकता देते हैं और हम भी देश में जन्म लेने से देश की नागरिकता पाने के हकदार बन जाते हैं। ऐसे में जन्म लेने वाली जगह पर मालिकाना हक संविधान को भी मंज़ूर होना लाज़िम है। अगर अभी तक आपको जानकारी नहीं है तो पता कर लीजिये अपने जन्म स्थान के बारे में ये आपके काम कभी भी आ सकता है। चाहे ऐसा कुछ भी होना संभव नहीं है आपको लगता है तब भी सोचने में हर्ज़ ही क्या है। सोचना ऐसा कार्य है जिस में कोई निवेश करना होता है और सोच सकते हैं जो भी आपको अच्छा लगता है। दुनिया जाए भाड़ में आप सोचिए जो सोचना चाहते हैं। स्वर्ग का आनंद मिलता है।

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