Friday, 21 September 2018

आग़ पानी को लगानी चाहिए ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

  आग़ पानी को लगानी चाहिए ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" 

आग़ पानी को लगानी चाहिए ,
इश्क़ की ऐसी कहानी चाहिए। 

बेवफ़ाई का सिला देना हो गर ,
बात उनकी भूल जानी चाहिए। 

पत्थरों के लोग घर शीशे के हैं ,
और क्या क्या मेहरबानी चाहिए। 

आज तनहाई बहुत अच्छी लगी ,
रुत सुहानी अब बुलानी चाहिए। 

ज़िंदगी भी मौत को है ढूंढती ,
मौत को भी ज़िन्दगानी चाहिए। 

फ़ाश उनके राज़ होंगे एक दिन ,
बात दुनिया को बतानी चाहिए। 

झूठ की तक़रीर , सारे कर गये ,
सच भी "तनहा" की ज़ुबानी चाहिए।

1 comment:

SANJAY Tanha said...

उम्दा ग़ज़ल है👌