Sunday, 24 June 2018

परिभाषाओं की पाठशाला ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया ----- सफलता की कोचिंग क्लासेज

      परिभाषाओं की पाठशाला ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया 

                         सफलता की कोचिंग क्लासेज 

बस कुछ घंटों में आपको गुरु बना सकती है मेरी परिभाषाओं की जानकारी।  कोई फीस नहीं और जैसे बीमा कंपनी वाले कोई छुपे चार्जेज नहीं कहते हैं वो भी। आम भी और दाम गुठलियों के भी नहीं। आम का मौसम है आप आम खाओ और गुठलियां साथ ले जाओ घर पर बोने को। ये सबक अपने बच्चों को पढ़कर उनको भी समझाना अपने बच्चों को समझाएं। सबक शुरू करते हैं। परिभाषाओं का पहला पाठ। 

योग :-

अभी अभी सैर पर किसी को बताते सुना रात को खाना मज़ेदार था ज़्यादा खा लिया।  आज तो राउंड अधिक लगाने हैं। वर्कआउट का अर्थ काम करना नहीं है आराम से बैठे दिन भर अब जिम में आधुनिक बनकर किसी सिखाने वाले को हज़ारों रूपये देकर तंदरुस्त होने की बात करें। आप बिना किसी शिक्षा हासिल किये योगगुरु बनकर या जिम खोलकर खूब कमाई कर सकते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से कम कमाई नहीं इस में भी। 

दान-पुण्य :-

पाप की काली कमाई कर घबराना नहीं है। अमर अकबर एंथोनी फिल्म में सदी के महानायक का किरदार निभाना सीखो। फिफ्टी फिफ्टी तो भारत की सरकार भी करती है काला धन सफेद करने को। आप भी अपने अपने धर्म वालों को आधा आधा दे सकते हैं मगर नहीं। मैं आपको ये सलाह नहीं दूंगा। बस थोड़ा सा चुटकी भर नमक आटे में डालने की तरह ऊंठ के मुंह में जीरे की तरह या सरकारी धन का नाम का हिस्सा सब्सिडी के नाम पर भीख देने की तरह देने जैसा एक फीसदी ब्याज समझकर दानपेटी में नहीं डालना आपको किसी मंदिर मस्जिद नहीं तो शमशान भुमि में नाम लिखवा रसीद लेकर रखनी है। ऊपर जाते उसकी फोटो स्मार्ट फोन में लेते जाना भगवान को सबूत दिखाना। और कुछ साथ नहीं जाता मगर अपना स्मार्ट फोन कोई छोड़ टॉयलेट भी नहीं जाता तो मरते समय साथ वही जाना है जो आखिरी पल आपके मन में है।
 

समाज सेवा :-

चोखा धंधा है , समाज सेवा अपनी जेब से नहीं की जाती है। कोई संगठन बनाकर जनता से अथवा आजकल सरकारी विगाग से सम्पर्क स्तापित कर अपना रुतबा बढ़ाने को की जाती है। खुद अपनी इच्छाएं जो अपने पैसे से नहीं पूरी कर सके ऐसे समाज सेवा के नाम पर मिले धन से कर सकते हैं। कोई मुश्किल नहीं है आपको करना कुछ भी नहीं है , किसी अधिकारी के साथ मिलकर सरकारी दफ्तर में बैठे शान से रहने का लुत्फ़ उठा सकते हैं। जी हां जी जनाब कहना सीखना होता है। अगर अधिक लालच है तो कोई एन जी ओ बनाकर गरीबों की भलाई से नशा मुक्ति तक कोई भी काम कागज़ों पर कर सकते हैं। 

सरकारी योजनाओं के सहायक :-

आये दिन कोई न कोई योजना घोषित होती है। सर्व शिक्षा अभियान , मेक इन इंडिया , स्किल इंडिया नाम बदलते रहते हैं। आपको अधिक से अधिक लोगों के डाक्यूमेंट्स जमा कर सरकार को बताना होता है कि इन सब को प्रशिक्षण दे दिया है। क्या किया नहीं किया कोई नहीं जनता आपको प्रमाणपत्र देने होते हैं , बाद में उनका कोई फायदा हुआ या नहीं आपका फायदा हो गया है।

डॉक्टर और शिक्षक :-

भगवान का दूसरा रूप , गुरु गोविंद से बड़ा। किस युग की बात है। डाका डालने नहीं जाते लोग खुद आते हैं मज़बूरी में लुटने को। शिक्षा और स्वास्थ्य में खुली छूट है कोई रोकता नहीं टोकता नहीं। कोई मापदंड नहीं हैं सुविधा है या नहीं है शुल्क की हद कोई नहीं। मगर फिर भी दावा है सब से अच्छे हम हैं। बचकर जाने का रास्ता नहीं है सब रास्ते उसी तरफ को जाते हैं।  अभी भी कहीं कहीं पगडंडी बची हुई हैं कुछ लोग हैं जो इंसानियत को भूले नहीं हैं।

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