Tuesday, 19 June 2018

नारद मुनि जी की वापसी ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

    नारद मुनि जी की वापसी ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया 

    द्वारपाल ने भगवान से जाकर पूछा कि उसे बताएं दरवाज़ा खोले या बंद करे। चार साल से जो नारद जी गायब थे और आपके संदेश सुन तक नहीं रहे थे जवाब देने की तो बात ही क्या। नारायण नारायण की रट भी लगाना छोड़ दिया था और आपको नियमित रूप से घटनाओं की सूचना देना भी छोड़ दिया था। भगवान ने कहा तुमसे कभी मैंने या किसी देवी देवता ने कहा है कि नारद जी के लिए अथवा किसी के भी लिए द्वार बंद रखना है। द्वारपाल होता ही है सभी आने वालों को आदर सहित भीतर लेकर उचित स्थान देकर बिठा कर मुझे या जिस किसी से कोई मिलना चाहता हो उसे सूचना देने को। द्वारपाल ने कहा भगवान मुझे ये मालूम है मगर खुद नारद जी ने ऐसा पूछ कर आने को कहा है , उन्हें चिंता है कि शायद उनको पहले की तरह से आदर सहित यहां स्थान नहीं दिया जाये। भगवान ये वचन सुनते ही खुद उठकर द्वार पर चले आये और नारद जी को जाकर कहा मुनिवर आप को क्या हुआ है जो अपने ही घर वापस आने में ये संकोच कर रहे हैं। नारद जी ने धरती के इक भाग जो भारतवर्ष का एक राज्य है के सत्ताधारी का जारी फरमान का दिखाया जिस में अधिकारीयों को आदेश दिया गया था कि किसी विधायक या सांसद के आने पर कुर्सी से उठकर सम्मान देना है , भले आने वाला कोई दाग़दार और कई अपराधों का गुनहगार ही क्यों नहीं हो। भगवान सब समझ गये और मुस्कुराते हुए बोले मुनिवर आप किस दुविधा के शिकार हो गए हो। आपने मेरी कॉल्स को नहीं सुना और न ही कोई खबर भेजी तो क्या हुआ , मैं तो हर पल तुम्हारे सही सलामत होने की जानकारी लेता ही रहा। जब से आपने ही सी सी टीवी का विचार दिया तभी से सभी देवी देवताओं को घर बैठे दर्शन करने का लाभ उठता रहता हूं। आपके बारे यही समझा कि आप ज़रूर लोक कल्याण को कोई महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं चार साल से जो फुर्सत नहीं मिली मुझे आकर साक्षात दर्शन देते। आप आराम करिये और भोजन आदि के बाद कहिये जो भी आपने समझा है धरती पर रहते हुए ताकि आपके सुझाव के अनुसार जो ज़रूरी हो किया जा सके। 
                     नारद जी बोले आपसे छुपा कुछ भी नहीं है मगर मुझे चार साल की हर बात खुद बतानी है , इतना ही नहीं अपनी भूल और गलती की क्षमा नहीं सज़ा भी मांगनी है। मुझे चार साल पहले धरती पर जाने पर हर तरफ इक शोर सुनाई दिया कि कोई नया मसीहा आया है जो दावा करता है कि उस से पहले सभी खराब लोग शासन करते रहे और केवल वही जनता को अच्छे दिन दिखलाने को आया है। जिधर देखो उस के नाम की गूंज थी और ऐसा लगता था वास्तविक भगवान यही है। उस के भक्त होने का दावा करने वाले किसी को उसके विरुद्ध एक शब्द नहीं बोलने देते थे और उसका विरोध देश का विरोध घोषित कर दिया जाता था। कोई कुछ भी समझ नहीं पाता था कि जो मंदिर मंदिर जाकर पूजा पाठ करता है वो पहले जो जो कहता रहता था सत्ता पाकर उसके विपरीत कहने लगा था। सच के बराबर कोई तप नहीं है और झूठ के समान कोई पाप नहीं है ये सब जानते हैं फिर भी उसके झूठ को किसी ने पाप नहीं समझा ये कैसा धर्म कैसी भक्ति है। मेरी मति भी मारी गई सोशल मीडिया के शोर में कुछ सोचने की फुर्सत कहां थी। चार साल बाद कहीं भी अच्छे दिन दिखाई नहीं देते हैं और जो बात सामने आई है वो ये है कि इक व्यक्ति खुद को देश से बड़ा समझने लगा है और उसको जनता से कोई मतलब नहीं है , केवल अपने दल और संगठन के लोग ही दिखाई देते हैं। उसे एक ही काम करना है हमेशा अपना शासन बनाये रखना वो भी देश को कुछ काम दिखला कर नहीं बल्कि इक खौफ दिखला कर कि उसके सिवा कोई भी देश की बागडोर नहीं संभाल सकता। भगवान उस से पहले कितने लोग आये और चले गए मगर कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई समझता कि देश उसी के आसरे है। ये तो भगवान आपने भी कभी नहीं समझा कि बिना आपके दुनिया नहीं रहेगी। आपको तो उस महिला का वो भजन भी पसंद है जिस में वो कहती है :-

          भगवन बनकर तू मान न कर , तेरा मान बढ़ाया भक्तों ने ,

          बनाई होगी दुनिया तुमने पर , भगवान है बनाया भक्तों ने। 

भगवान मेरा मन घबरा रहा है कहीं यही चलता रहा तो लोग आपको छोड़ उसे ही भगवान नहीं घोषित कर दें। जब जब किसी ने खुद को भगवान घोषित किया है बहुत बुरा होता रहा है। मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है जो एक सत्ता के लालची को मसीहा समझने वालों की बातों में बहक गया था और आपको भी अनदेखा करने लगा। आपको कोई अंतर नहीं पड़ता है मुझे मालूम है। भगवान हैं आप किसी की स्तुति से खुश नहीं होते न ही जो आपका गुणगान नहीं करता उससे नाराज़ होते हैं। आप सभी से प्यार करते हैं मगर किसी से राग नहीं द्वेष नहीं रखते हैं। किसी भी धर्म की किताब में आपने नहीं आदेश दिया कि मेरे सामने आकर सीस झुकाओ , लोग खुद ही सर झुकाते हैं मगर आप को इस से कभी अंहकार नहीं हुआ है। अहंकारी लोगों का अहंकार कभी रहता नहीं है। मुझे डर है ये खुद को भगवान समझने वाले और धर्म की उल्टी व्याख्या करने वाले भारत देश को किस दिशा में ले जाएंगे। अगली बार सत्ता मिली तो और निरकुंश होकर बंदूक तानकर अपना आदर सम्मान करवाएंगे।

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