Sunday, 1 April 2018

मेरे मन की बात ( बेसिरपैर की बात ) डॉ लोक सेतिया

    मेरे मन की बात ( बेसिरपैर की बात ) डॉ लोक सेतिया

न तो मैं कोई सत्ताधारी नेता हूं और न ही मुझे आज पहली अप्रैल को किसी को मूर्ख बनाने की मूर्खता ही करनी है। मुझे इस अवसर पर खुलकर मन की बात करनी है। मन की बात सभी से नहीं की जाती न कर ही सकते हैं। मन की बातें मन ही जानता है और मन ही मन से मन की बात करता है। कुछ साल पहले तक माना जाता था कि मन या दिल की बात किसी एक से ही कर सकते हैं मगर जीवन भर ऐसा कोई मिलता ही नहीं जिस से हम अपने मन की बात कहें भी और वो समझे भी। याद आया मन की बात शीर्षक से मेरी इक कविता भी है लिखी हुई। ग़ालिब न वो समझे हैं न समझेंगे मेरी बात। आज सोचा जब देश का मुखिया मन की बात करता है रेडिओ पर चाहे कोई सुने न सुने समझे न समझे तो हम भी कह सकते हैं। मन की गहराईयां बहुत होती हैं और मन की थाह पाना आसान नहीं होता। इक दोहा है :-

                    प्राणि अपने प्रभु से पूछे किस बिद्ध पाऊं तोहे ,

                     प्रभु कहे तू मन को पा ले पा जाएगा मोहे।

जिसको मन की बात कहनी थी समय पर नहीं कह सके तो अब सब को कहते हैं , मगर ये सच में मन की बात नहीं है। मन की बात कभी झूठ नहीं होती , मन जानता है। आप देश की जनता को दुनिया को मूर्ख बना सकते हैं मन को नहीं। आपका मन जानता है आप झूठे हैं और झूठी तालियां महंगी पड़ती हैं। बहुत दिन तक बहुत लोगों को मूर्ख बना सकते हैं मगर सभी को हमेशा के लिए नहीं। सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है। यहां भी आप सोचोगे मुझे तो रामजी के पास जाना है खुदा से मुझे क्या लेना देना , लेकिन वहां ईश्वर की अलग अलग दुकानें नहीं हैं एक ही है ज़रा सीबीआई जैसी एजेंसी से पता लगवा लो। मन भी कितना अजीब है अपनी बात करनी थी और उसकी करने लग गया जिस के पास मन नाम का कुछ भी नहीं। नेताओं के पास दिल ज़मीर ईमान और ईमानदारी के नाम पर पोशाक ही होती हैं जिनको ज़रूरत अनुसार बदल लेते हैं। अभी देखो इक खिलाड़ी शायरी करता है टीवी पर मगर नेता बनकर कल एक नेता पर जो चोरी का शेर पढ़ता था अब नाम बदल दूजे पर चिपकाता है। छोड़ो उनकी बात आगे करते हैं सच्चे मन की बात। 
                    मुश्किल बहुत है भाई मन की बात दिल की बात भीतर ही रह जाती है जुबां पर आती ही नहीं। अगर दिलबर की रुसवाई हमें मंज़ूर हो जाए , सनम तू बेवफ़ा के नाम से मशहूर हो जाए। खिलौना फिल्म भी कमाल थी इक नाचने वाली इक पागल से इश्क़ कर बैठी। ये इश्क़ होता ही पागल है मूर्ख लोग इश्क़ किया करते हैं। समझदारी पास हो तो किसी हसीना से प्यार नहीं होता कभी। देशभक्ति भी इश्क़ ही है जिनको सत्ता की भूख हो वो समझदार राजनीति कर सकते हैं और देशप्रेम पर केवल भाषण दे सकते हैं। मित्रो मैंने गलत तो नहीं कहा , ठीक कहा है ना। ताली बजाओ। 
                पढ़ते पढ़ते आपको लगा ये लेखक भी पहली अप्रैल को मूर्ख तो नहीं बना रहा जो अभी तक मन की बात बताई ही नहीं। माफ़ करना मन भटक जाता है जो सोचता है नहीं समझ आता है। मन मन ही मन अपनी मूर्खता पर मुस्कुराता है। मूर्ख बन जाना बुरा नहीं होता , बुरा होता है दूसरों को मूर्ख बनाकर अपना उल्लू सीधा करना। अपने देश की हालत खराब समझदार लोगों ने ही की है मूर्ख लोग कभी देश का कबाड़ा नहीं करते हैं। हम में अधिकतर मूर्ख और नासमझ लोग हैं जो खुद को समझदार दिखलाना चाहते हैं मगर कोई यकीन नहीं करता अपनी बात पर। सब यही मानते हैं ये मूर्ख अपने को अक्लमंद समझता है। और जो वास्तव में समझदार लोग हैं वो खुद को बेहद मासूम और भोला दिखलाते हैं और हमपर राज करते हुए दावा करते हैं हम सेवक हैं। अब देखो आम लोग चार साल में दुबले क्या सूख कर कांटा हो गए हैं और कोई सेवक बनकर अठाहर घंटे काम करने की बात कहता फिर भी देश विदेश भाग दौड़ करने के बाद भी और तंदरुस्त और मोटा ताज़ा हो गया है। मन की बात का कमाल है। हम हैं कि आज भी मन की मन ही में रही कहने की चाह थी कह सकते थे मगर नहीं कही। कहो मित्रो कैसी रही।  

1 comment:

sanjay dayalpuri said...

Bdhiya h..."Man ki baat"...👌👌