Thursday, 15 June 2017

आप जो मिल गए ज़िंदगी मिल गई ( डॉ लोक सेतिया "तनहा" )

  आप जो मिल गए ज़िंदगी मिल गई ( डॉ लोक सेतिया "तनहा" )

पी लिया जाम इक बेखुदी मिल गई ,
मिल गए आप तो ज़िंदगी मिल गई। 

इश्क़ ऐसे हुआ जिस तरह से से कहीं ,
खुद समंदर से आकर नदी मिल गई।

जल रहा धूप में था हमारा बदन ,
पर तभी प्यार की चांदनी मिल गई।

उम्र भर हम अकेले ही चलते रहे ,
ढूंढते थे उसे शायरी मिल गई।

ख्वाब हर रात "तनहा" वही देखता ,
मोड़ पर ज़िंदगी थी खड़ी मिल गई।

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