Sunday, 4 June 2017

6 Kavitayen Jeevan Ki ( Kavita ) Dr. Lok Setia

                 जीवन की कविताएं 

    1 ज़िंदगी 

मिट्टी के ढेर के तले 
सांसे दफ़्न हो रही हैं 
और कोई मां पल पल 
उस मिट्टी के ढेर को 
रात दिन मेहनत कर 
हटाती रहती है लगातार 
और देती है जन्म इक 
मासूम सी नन्हीं सी जान को। 

2 संघर्ष 

ये कौन है जो समझता है 
मेरा अधिकार है उस पर 
मैंने दिया है उसे जीवन 
उसे जीना है मेरे लिए 
मेरे समझाए ढंग से ही 
मैं पिता हूं पालक हूं उसका 
मेरा अधिकार है संतान पर। 

3 कैसी ज़िंदगी 

दो तरह की मिलती है ज़िंदगी 
अग्रिम भुगतान प्रीपेड जैसी 
जिसकी तय तिथि से पहले ही 
वैधता को आगे बढ़वाना होता है 
अन्यथा चलती नहीं सांसे आगे 
या फिर पोस्ट पेड वाली जिस का 
हिसाब चुकाना पड़ता है हर महीने 
आपको समझना होता है आपके लिए 
सस्ते दाम वाली है कौन सी ज़िंदगी। 

4   सामान जीने का 

सौ बरस तक जीने का सामान है 
और हर दिन मरने का अरमान है 
चाहते जाना किसी दिशा को पर 
और दिशा है जाना ये फरमान है 
खो रहे खुद पल पल अपना मगर 
पा लिया कितना यही अभिमान है 
हाथ खाली थे खाली ही रह गए 
जो खज़ाना था जमा किसको दिया 
हर तरफ फैला इक रेगिस्तान है। 

5  दुनिया 

ये बड़ी बेरहम सी है बला कोई 
बुरा कहती नहीं कहती भला कोई 
आप को चैन से रहने नहीं देती कभी
थमता नहीं उसका यही सिलसिला कभी
हर मोड़ पर देते हैं सामन मौत का
आपको स्वर्ग भी दिखलाते हैं कई
पास उनके बस केवल नर्क की सज़ा
लेते हैं दर्द देकर कितना सब मज़ा
आपको कहते हैं तेरे हमदर्द हैं जो
बस दिया उन्हीं का मिला है दर्द जो
और कोई जगह नहीं रहने को कहीं
चाहो न चाहो जीना मरना है यहीं।

6 क्षणिका 

नहीं कहानी नहीं कोई ग़ज़ल भी 
एक घटना की है ये लघुकथा कोई 
आपकी डायरी के पेज दो निर्धारित  हैं
पहला और अंतिम लिखा हुआ मिला 
बीच में लिखनी है अपनी बात सब 
आप को लगता है ये उपन्यास है  पर
जबकि वास्तव में ज़िंदगी है क्षणिका कोई।

 

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