Wednesday, 24 May 2017

मंदिर चालीसा काण्ड आरती का पेटेंट ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया


मंदिर चालीसा काण्ड आरती का पेटेंट ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

 कलयुगी अवतार प्रकट हो चुके हैं , तीन साल से हर तरफ यही शोर है। मुझे ख्याल आया क्या किसी ने उनके नाम से आरती , चालीसा , उनका कांड लिख छपवा लिया है। गूगल से सब जानकारी हासिल की जा सकती है , तुरंत पता चला अभी तक किसी ने ये महान कार्य नहीं किया। शायद मुझे ही करना हो तभी किसी ने इस बारे सोचा ही नहीं। मुझ से पहले कोई दूसरा नहीं लिख ले इसलिए सब से पहले मैंने आधुनिक भगवान का मंदिर , उनकी आरती , उनका चालीसा , उनका काण्ड सभी पर अपना कॉपी राइट करवा लिया है। जब तक लिखूंगा छपवाऊंगा तब तक उसका प्रमोशन भी शुरू कर रहा हूं , जिस को अपना कल्याण कराना हो और इस धरती पर जीते जी स्वर्ग का सुख पाना हो , उसको मंदिर में दर्शन से लेकर आरती चालीसा और काण्ड की प्रति आरक्षित करवा लेनी चाहिए मुझे अग्रिम भुगतान कर के। सिमित प्रतियां छपवाने की बात कहना ज़रूरी है ताकि लोग भाग भाग सब से पहले बुकिंग करवा मुझे आधुनिक बाबा जी की तरह मालामाल कर दें। ये बताना ज़रूरी है कि इन की केवल हार्ड कॉपी ही उपलब्ध होगी आप उसको गूगल व्हाट्सएप्प अदि पर तलाश करोगे तो निराश हो जाओगे। मुफ्त कुछ भी नहीं मिलेगा , मरने से देख तो लो स्वर्ग की असलियत क्या है , अन्यथा स्वर्ग की कामना करते मरोगे मगर जब ऊपर जाकर हाल देखा तो सोचोगे ये कितनी बड़ी भूल हुई। स्वर्ग की दशा भारत देश से बदतर मिली और सामने देखा कि नर्क में तो सब के मज़े हैं , तब आपको कोई वहां ट्रांसफर नहीं करेगा लाख विनती करना। इसलिए कुछ हज़ार की बात है आधुनिक कलयुगी अवतार के मंदिर में दर्शन और उसका गुणगान करने का हर मंत्र मेरी लिखी आरती , मेरा लिखा चालीसा और कांड पढ़कर अपने जीवन को सफल बनाएं। नहीं मैं ये सब कोई जनकल्याण की खातिर नहीं कर रहा हूं , और लोगों की तरह इतना बड़ा झूठ मैं नहीं कर सकता , शुद्ध व्यापार की तरह कमाई करने को कर रहा हूं। आपको भुगतान नकद काली कमाई से करने तक की छूट है।  मंदिर में अर्पित धन काले से सफेद हो जाता है ठीक राजनीतिक दल को मिले चंदे की तरह। पाप और पुण्य की भी कलयुगी परिभाषा आपको समझाई जानी है , जब कोई और दल या नेता करे तब जो अपराध और पाप कहलाता है , वही जब खुद सत्ता में आकर करते हैं तब राजधर्म बन जाता है। इक तथ्य सर्वविदित है राजा कभी गलत नहीं होता , भगवा वेस धारण कर आप अपशब्द भी बोलते हैं तब उसको प्रवचन माना जाता है।
                 अंत में जैसे कथा का सार बताना ज़रूरी होता है , हर कथा के आखिर में लिखा हुआ होता है , इस को पढ़ने से क्या फल प्राप्त होगा। उसी तरह ये बताना आवश्यक है कि सतयुगी देवी देवताओं की आरती पूजा कलयुग में किसी काम नहीं आती है। आप कलयुगी इंसान हैं आपके देवी देवता भी इसी युग वाले कल्याणकारी होंगे , सतयुगी भगवान , देवी देवताओं की उपासना से अभी तक आपका कल्याण हुआ है , इस बात पर विचार करना। और सब लोग अपने लिए आरक्षण करवा लें और आप बाद में हाथ मलते रह जाएं ऐसा नहीं होने दें। जितना जल्द हो अपनी बुकिंग करवा लो , अगर जेब खाली है तो लोन की सुविधा भी खुद आधुनिक भगवान ने हर बैंक में उपलब्ध कराई हुई है , बिना किसी गारंटी के। जल्दी करो , पहले आओ पहले पाओ का नियम लागू है।

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