Sunday, 26 March 2017

कोई मुझे उसका पता बता दे ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

कोई मुझे
उसका पता बता दे ,
जिस गांव जिस शहर
जिस राज्य में ,
कोई अधिकारी
खुद को राजा नहीं समझता ,
कोई सरकारी कर्मचारी
घूस नहीं चाहता हो ,
कोई थानेदार बेगुनाह पर
ज़ुल्म नहीं करता हो ,
किसी की फरियाद हाकिम
अनसुनी नहीं करता हो ,
किसी नागरिक को
अपने अधिकार भीख की तरह
मांगने नहीं पड़ते हों ,
जिस गली में
कोई गंदगी दिखाई नहीं देती हो ,
किसी तरह की भी गंदगी ,
जिस सरकारी दवाखाने में
कोई रोगी बिना इलाज
नहीं मरता हो ,
जिस अदालत में
न्याय इतने विलंब से
नहीं मिलता कि अन्याय लगे ,
जिस जगह
आम नागरिक होना
जुर्म नहीं समझा जाता हो
अभी तलक ,
कोई नेता
कोई मंत्री
कोई मुख्यमंत्री
कोई प्रधानमंत्री
मुझे भी बता दे वो जगह ,
जिस जगह को
उसने वास्तव में
आज़ादी से जीने के काबिल
बना दिया हो अब तो ,
मुझे पल दो पल
देखना है उस
सपनों के आज़ाद भारत
की तस्वीर को ज़िंदा रहते ,
वो ख्वाब जन्नत का
वो सपना स्वर्ग जैसे
सारे जहां से अच्छे वतन का सबका ,
किसी को कभी तो
सच हुआ आया ही होगा नज़र
मुझे देखना है
एक बार खुद जाकर ,
सभी सरकारी
विज्ञापनों वाला हिंदुस्तान
जिसकी खबर छपती है
हर अख़बार में अब।

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