Wednesday, 11 January 2017

( बेदाग़ लोग मत पढ़ें )***--- दाग़ मिटाने का शर्तिया उपाय ( हास्य कविता ) 2 0 भाग तीन -- डॉ लोक सेतिया

परेशान क्यों होते हैं जनाब , बुरे नहीं होते सभी दाग़ ,
आप जैसे भी हैं सच्चे हैं , आप पर लगे दाग़ अच्छे हैं।
आप से पहले भी आये लोग , हमने सभी के मिटाये दाग़ ,
लोग कहते रहें उनको चोर , फैसला हमने किया कर गौर ,
झूठ अपराध का नहीं निशान , बस इसी से बढ़ गई थी शान ,
बरी जो हुआ वो नहीं गुनहगार , फिर से बन गई थी सरकार।
सुन जो आज इनकी भी बात , अदालत को नहीं भाया सबूत ,
आप मान लो नहीं ली घूस , हुई नहीं कभी ऐसी करतूत !
कल तलक यही कहते थे औरों को , घोटालों के हो गुनहगार ,
उन पर भी किसी अदालत ने अभी , दिया क्या कोई निर्णय सरकार।
चारा घोटाला , हवाला घोटाला या , चाहे कोई भी हुआ घोटाला ,
नहीं साबित हुआ आज तक किसी का अपराध सुनो रे लाला।
बस अदालत जब कहती नहीं हैं काफी सबूत जुर्म होने के ,
समझो दिन ख़ुशी के हैं अब नहीं आजकल दिन रोने के ,
बड़े बड़े वकील छोटी से बड़ी अदालत तक का लंबा सफर ,
डिटरजेंट बहुत मिल जाते हैं हर किसी के दाग़ धोने के।
जनता बेशक कभी किसी को आरोप मुक्त करती नहीं ,
सच ये है सज़ा किसी को भी मिलती अभी तक नहीं।
बातें बहुत मगर तुम्हें कहना नहीं कुछ सिवा शब्द तीन ,
अभी नहीं आया निर्णय , मुझे अदालत पर है पूरा यकीन।
सोचो अगर अभी तक जिन जिन घोटालों में नहीं हुआ फैसला ,
क्या यही समझ लिया जाये वो सब सच में नहीं हुआ।
जांच आयोग कितने खुद ही बिठाये नेताओं ने बार बार ,
खोदा पहाड़ कितना निकाली मरी चुहिया ही सरकार।

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