Sunday, 27 November 2016

दस्तकों का अब किवाड़ों पर असर होगा ज़रूर ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

         नारद जी क्या कह रहे प्रभु को बिल्कुल समझ नहीं आया। कौन हैं जो भूखे हैं गरीब हैं। प्रभु को तो नहीं दिखाई दिये ऐसे लोग। रोज़ जो भी आते हैं उनके मन्दिरों मस्जिदों गिरिजाघरों गुरुद्वारों में सभी कितना अच्छा स्वादिष्ट प्रसाद लाते हैं और इतना अधिक धन उनको देते हैं चढ़ावे में कि अंबार लगे हुए हैं। रोज़ कितनी धूम धाम से कोई न कोई त्यौहार मनाते हैं। स्वर्गलोक से भी देखो तो धरती कैसी सुंदर अप्सरा जैसी चमकती हुई लगती है। वहां की रौशनी देख सभी देवी-देवताओं की आंखें चुंधिया जाती हैं। शासन करने वालों की कितनी जय-जयकार होती रहती है रोज़ हर तरफ। उनकी निराली शान देख कर तो प्रभु भी आह भरते हैं कि काश मेरे पास भी इतना सब कुछ होता। जिस देश के शासक का ऐसा ठाठ हो उसकी जनता भला भूखी कैसे रह सकती है। लोकतंत्र स्थापित यही सोच कर तो किया था कि जनता खुशहाल हो सके। नारद जी बोले मैं आपको कैसी समझाऊं जो सब जान समझ भी नासमझ बने हुए हो। आप अपनी महिमा का गुणगान सुनते सुनते इतना खो गये कि आपको बाकी कोई दिखाई नहीं देता। किसी शायर ने सही कहा है
                      " खुदा मुझ को ऐसी खुदाई न दे , कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे। "
यही हाल धरती पर आपके भारत देश का है। आपने तेतीस करोड़ देवी देवता बना डाले , उन्होंने कुछ हज़ार सांसद विधायक मंत्री और ऊंचे ऊंचे ओहदे बना लिये जिनको वी आई पी नाम दे दिया। बस उनको सभी कुछ चाहिए अपने लिये और सभी भाड़ में जायें। आप सोच रहे हो जनता के पास हर अधिकार है वही बनाती है नेताओं को शासक फिर उसको अनदेखा कोई किस तरह कर सकता है। आप ही बताओ आप भगवान बन गये पर बनाया किस ने , यही लोग हैं जिन्होंने आपको अपना भाग्य विधाता समझा और सब छोड़ दिया आप पर। युगों से ये आप ही के भरोसे जी रही है मगर आपने उनकी सुध ली नहीं कभी। अपनी आरती पूजा और स्तुतिगान में इतने मुग्ध हो गये कि ये भी याद नहीं रखा कि इतनी बड़ी दुनिया बना दी तो उसकी हालत भी अच्छी रखनी है। संतान को पैदा किया पर लालन पालन को अपना कर्तव्य नहीं समझा , काश जब लोग भूख से बिलखते और उनको रातों में नींद नहीं आती खाली पेट तब आपको उस हालत का एहसास होता।
                              भगवान है का विश्वास बेचारे लोगों को छलता रहा है , सभी सोचते हैं कभी तो भगवान उनकी सुनेगा और अच्छे दिन आयेंगे। उसे क्या पता भगवान अपनी इक अलग दुनिया में बड़े सुख चैन से रहता है दुनिया को उसके हाल पर छोड़कर। धरती पर शासक भी आपकी तरह हैं जब जनता से उसका सब कुछ छीनना चाहें पल भर में छीन लेते इक आदेश से ही , मगर जब जनता को थोड़ा भी देना हो तब विवशता की बात करते हैं। अच्छे दिन का वादा तो करते हैं मगर वादा पूरा कब तलक होगा कभी नहीं बताते। सत्ता मिलते वो वादा भूल जाते हैं और जनता को बहलाने को कोई नई चाल चलने लगते हैं। जनता को वही दिखाई देता है जिस का शोर होता है।
                                         भगवान भी पछता रहे हैं दुनिया बनाकर , अकेले भगवान कुछ भी नहीं कर सकते , आज तक किसी भी देवी देवता ने उनको असलियत बताना ज़रूरी ही समझा। इन देवी देवताओं को ही तो नियुक्त किया था संसार की भलाई करने को , सभी खुदगर्ज़ बन गये अपना अपना स्वर्ग धरती पर बनाने में लग गये। अब उनको सुधारा भी नहीं जा सकता न ही खुद उनको अधिकार भी है उनको हटाने का , यही भूल हुई थी बनाते समय उनको ठीक कार्य नहीं करने पर हटाने का प्रावधान रखना था। नारद जी बोले भगवान तब भी कुछ नहीं होता , लोकतंत्र में पांच साल बाद जनता को सरकार बदलने का अधिकार है फिर भी जनता के लिये कभी बदलता कुछ भी नहीं।  केवल सत्ताधारी लोग बदल जाते हैं। पर नहीं अब भगवान और तमाशाई नहीं बने रहेंगे , बुलवा भेजा है सभी देवी-देवताओं को। देखते हैं क्या निर्णय करते हैं सभी मिल कर। नारद जी चल पड़े हैं सभी को बुलाने। नारायण नारायण।

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