Saturday, 8 October 2016

स्वछता अभियान से तमाम खोखली बातों तक ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

        ये बात सबसे पहले साफ कर देना चाहता हूं कि मुझे दल अथवा व्यक्ति से न कोई लगाव है न ही विरोध ही। ये भी हो सकता है जो मैं जैसे देखता हूं बाकी लोग उस तरह नहीं देखते हों , इसलिये आप मुझे से असहमत हों तो ये आपका अधिकार है। मगर मुझे जो बात जैसे लगती है मैं उस बारे अपनी राय रखने का हक तो रखता ही हूं। जब से मोदी जी की सरकार आई है हर कुछ दिन बाद कुछ न कुछ नया सामने आता रहता है जनता को बतलाने को कि ये सरकार कितना काम कर रही है। शुरुआत हुई थी दफ्तर में मंत्री से अधिकारी तक समय पर आने को लेकर। उसके बाद बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की चर्चा , फिर मेक इन इंडिया , गंगा सफाई योजना से स्वच्छता अभियान की बात और खुले में शौच बंद करने की बात। अगर आप भी गौर से देखते हैं अपने आस पास क्या होता है और क्या बदला है तो समझ सकते हैं जो दावे किये जाते हैं और जो असलियत सामने दिखाई देती है उनमें कोई मेल होता नहीं है। आज भी किसी भी सरकारी दफ्तर जाकर देख सकते हैं कोई भी सुबह समय पर आता नहीं है। महिलाओं के साथ शोषण और अपराध आज भी कम नहीं हुए हैं और पुलिस या प्रशासन का ढंग आज भी बदला नहीं है। आज भी जब कोई महिला शिकायत करती है तो प्रयास किया जाता है पुलिस और पशासन द्वारा कि किसी तरह मामला सुलट जाये समझौता करवा दिया जाये। सही और गलत को समझना और ऐसी घटनाओं को नहीं होने देना किसी की प्राथमिकता ही नहीं है। कन्या भ्रूण हत्या की हालत आज भी यही है कि लिंग जांच की जा रही है और ज़्यादा पैसे लेकर। स्वच्छता अभियान और सरकारी लोगों के काम का ढंग बदलना दोनों कहीं भी कारगर होते दिखते नहीं हैं। गंदगी पहले से अधिक ही हुई लगती है और सरकारी अधिकारी आज भी मनमानी करते हैं। कायदे क़ानून तोड़ने वाले बेफिक्र हैं और सभ्य नागरिक उल्टा अधिक परेशान प्रशासन को शिकायत कर के। प्रशासन आज भी सरकारी  प्लाट्स पर या  सरकारी भूमि पर सड़कों पर फुटपाथों पर नाजायज़ कब्ज़ा किये हुए लोगों पर कोई कठोर करवाई नहीं करना चाहता । विभाग के अधिकारी आंखे बंद किये हुए हैं।
              शायद जिस गति से इस सरकार की योजनाओं के विज्ञापन बदलते हैं गिरगिट भी रंग नहीं बदलती होगी। क्या नेता समझते हैं कि हर कुछ दिन में कोई नया शोर कोई तमाशा कोई आडंबर करते रहने से जनता भूल जाएगी पिछली बात को जो मात्र प्रचार ही बन कर रही। कुछ तस्वीरें हैं जो स्पष्ट करती हैं मेरे फतेहाबाद शहर जो हरियाणा का एक ज़िला भी है उसकी सबसे पॉश कालोनी की गंदगी और सरकारी विभाग की खाली दुकानों पर खुलेआम अनाधिकृत कब्ज़े को विभाग की अनदेखी या सहमति से। अगर हरियाणा सरकार वास्तव में भ्र्ष्टाचार को समाप्त करना चाहती है तो ये वास्विकता उसको हर शहर में देखनी और बदलनी होगी।





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