Sunday, 10 November 2013

स्वर्ग लोक में उल्टा पुल्टा ( तरकश ) डा लोक सेतिया

स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। हर तरफ शानदार दृष्य सजावट का , राहों पर रंग बिरंगे फूल बिछे हैं।
ऐसा यहां कभी कभी ही होता है , कई कई सालों बाद जब स्वर्ग लोक में किसी ऐसी आत्मा ने आना होता है जो ईश्वर को बेहद प्रिय हो। सभी देवी देवता , तमाम स्वर्गवासी उपस्थित रहते हैं ऐसी आत्मा के स्वागत करने के लिये। सभी हाथों में पुष्प लिये खड़े हैं , आने वाली आत्मा पर वर्षा करने के लिये। तभी आकाशवाणी होती है , स्वागत को तैयार रहें , भारत भूमि से एक महान व्यंग्कार की आत्मा का आगमन होने वाला है। ईश्वर के दूत जसपाल भट्टी जी को लाते हैं पालकी पर बिठा कर और ईश्वर के दरबार में सम्मान सहित आसन पर बिठा देते हैं। ईश्वर प्रकट होते हैं और जसपाल भट्टी के पास जाकर कहते हैं , प्रिय पुत्र जसपाल भट्टी आपका यहां बहुत बहुत स्वागत है। जसपाल भट्टी का चेहरा सदा की तरह गंभीर नज़र आ रहा है , जैसे कुछ सोच विचार कर रहे हों। थोड़ी देर में भट्टी जी बोलते हैं , आपके दूत कह रहे थे आपने मुझे बुलाया है स्वर्गलोक में , क्या यही स्वर्गलोक है। ईश्वर बोले आप अब स्वर्गलोक में ही हैं। भट्टी जी ने पूछा ये सब सजावट , स्वागत द्वार।
ईश्वर बोले आपके लिये ये सारा स्वागत है पुत्र। भट्टी कहने लगे आपकी माया मुझे समझ नहीं आई , क्या आप मेरी उल्टा पुल्टा बातों का मुझे जवाब दे सकेंगे। ईश्वर बोले आप जो भी चाहो बेझिझक पूछ सकते हैं।
   जसपाल भट्टी कहने लगे मुझे तो लग रहा था आपके दूत भूल से मुझे वहीं धरती पर ले आये हैं , जहां मुख्य मंत्री प्रधान मंत्री अथवा किसी विदेशी महमान के आने पर देश की गरीबी और बदहाली को छिपाने को मार्गों को सजा दिया जाता है , और उनके मार्ग से गुज़रते ही सारी सजावट हटा ली जाती है। लेकिन क्षमा करें मैं  राजनेता नहीं हूं जो उस सजावट के पीछे का सच नहीं देखना चाहते। मैंने तो यहां आते हुए पूरा दृष्य ध्यान से देखा है , आपके इस स्वर्गलोक का हाल भी मुझे कुछ अच्छा नहीं दिखाई दिया।  और मैं सोच रहा हूं कि हम धरती वाले बेकार आपसे उम्मीद लगाये बैठे हैं कि वहां सब ठीक करोगे , जब आप अपने इस लोक का ही ध्यान नहीं रख रहे तो उस लोक की क्या फ़िक्र आपको होगी।
             भट्टी जी बात सुनकर प्रभु उदास हो गये , बोले आपने सही कहा है पुत्र। मैं कब से परेशान हूं कि कैसे यहां सब सही किया जाये। बस इसी काम के लिये तुम्हें समय से पहले ही बुलवा लिया है। कुछ दिन पहले तुमने जब विनती की थी कि अब तुमसे देश की दुर्दशा और देखी नहीं जाती क्योंकि अब नेताओं को शर्म नहीं आती जब उनके घोटालों का पर्दाफाश होता है। उनपर व्यंग्य करने से भी कुछ हासिल नहीं होता और तुम वो देखना नहीं चाहते अब। इसलिए आपकी उस विनती को सुन आपकी इच्छा पूर्ण करने के लिये ही आपको स्वर्गलोक में बुलवाना उचित समझा। शायद तुम यहां भी कुछ उल्टा पुल्टा , कोई फलॉप शो , कोई मुर्ख सभा का गठन कर स्वर्गलोक के वासियों , देवताओं , देवियों को समझा पाओ कि उनको करना कुछ था और वे कर कुछ और ही रहे हैं।
      स्वागत सभा के बाद ईश्वर भट्टी जी को अपने कक्ष में लेकर आये और बताया कि मैंने तो दुनिया को ढंग से सुचारू रूप से चलाने का पूरा प्रबंध किया था। हर देवी देवता को उनका विभाग सौंप दिया था पूरी तरह ताकि वो विश्व का कल्याण करें। मगर इन सभी ने वही किया जो नेता लोग किया करते हैं , जनता के कल्याण की राशि का उपयोग अपने खास लोगों को खुश करने को इस्तेमाल करना। उसी प्रकार सब देवी देवता भी अपनी कृपा दीन दुखियों पर न कर के अपना अपना धर्मस्थल बनाने वालों पर करने लगे जिसकी सज़ा आम लोग बिना अपराध किये भोग रहे हैं। जसपाल भट्टी बोले क्या आपने यहां कैग जैसी कोई संस्था नहीं बनाई हुई जो इनके कार्यों की बही खातों की नियमित जांच करती और अगर कोई अनियमितता हो तो आपको सूचित करती। ईश्वर बोले नहीं मुझे अपने सभी देवी देवताओं पर विश्वास था इसलिये किसी निगरानी कि व्यवस्था ही नहीं करना ज़रूरी लगा। हां नारद जी एक बार कह रहे थे कि चित्रगुप्त जी के हिसाब की जांच की जानी चाहये , क्योंकि उनको लगता है कि धरती पर अब कर्मों का फल उल्टा मिलने लगा है। पाप करने वाले फल फूल रहे हैं और धर्म पर चलने वाले दुखी हैं। जसपाल भट्टी जी का सुझाव मानकर ईश्वर ने स्वर्गलोक में कैग जैसी इक संस्था का गठन कर के जसपाल भट्टी जी को उसका कार्यभार सौंप दिया है। बहुत जल्द स्वर्गलोक में सब उल्टा पुल्टा होने की संभावना है।

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