Friday, 23 August 2013

सबक ( कविता ) 9 9 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

                    सबक ( कविता ) - डॉ लोक सेतिया 

जीवन का तुम्हारे ,
कुछ बुरा वक़्त हूं ,
आया हूं मगर ,
नहीं रहूंगा हमेशा ,
चला जाऊंगा मैं जब ,
लौट आयेगा अच्छा वक़्त।

मुझे देख कर तुम ,
घबराना मत कभी ,
सीखना सबक मुझसे ,
आ जायेगा तुमको ,
पहचानना अपने पराये को।

भूल मत जाना मुझे ,
मेरे जाने के बाद भी ,
याद रखना हमेशा ,
निभाया साथ किसने ,
छोड़ गया कौन इस हाल में।

खोना मत कभी उनको ,
हैं जो आज तुम्हारे साथ ,
गये चले जो छोड़कर ,
मत करना उनका इंतज़ार ,
कभी आयें जो वापस ,
फिर नहीं करना ऐतबार।

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