Monday, 3 June 2013

ग़ज़ल 2 0 5 ( अब सभी को खबर हो गई )

अब सभी को खबर हो गई ,
बेहयाई हुनर हो गई !
ख़त्म रिश्ते सभी कर लिये ,
बेरुखी इस कदर हो गई !
साथ कोई नहीं जब चला ,
शायरी हमसफ़र हो गई !
आपने ज़ुल्म इतने किये ,
हर ख़ुशी दर बदर हो गई !
कल अचानक मुलाकात इक ,
फिर उसी मोड़ पर हो गई !
आज नीची किसी की नज़र ,
क्यों हमें देखकर हो गई !
और "तनहा" नहीं कुछ हुआ ,
जुस्तजू बेअसर हो गई !

No comments: