Saturday, 1 June 2013

ग़ज़ल 2 0 4 ( कह रहे कुछ लोग उनको भले सरकार हैं )

कह रहे कुछ लोग उनको भले सरकार हैं ,
तुम परखना मत कभी खोखले किरदार हैं !
छोड़कर ईमान को लोग नेता बन गये ,
दो टके के लोग तक बन गये सरदार हैं !
देखकर तूफ़ान को, छोड़ दी पतवार तक ,
डूबने के बन गये अब सभी आसार हैं !
फेर ली उसने नज़र, देखकर आता हमें ,
इस कदर रूठे हुए आजकल दिलदार हैं !
पास पहली बार आये हमारे मेहरबां ,
और फिर कहने लगे फासले दरकार हैं !
हम समझते हैं अदाएं हसीनों की सभी ,
आपके इनकार में भी छुपे इकरार हैं !
गैर जब अपने बने, तब यही "तनहा" कहा ,
ज़िंदगी तुझसे हुए आज हम दो चार हैं !

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