Thursday, 20 June 2013

ग़ज़ल 2 0 7 ( सितम रोज़ दुनिया के सहते रहेंगे )

 सितम रोज़ दुनिया के सहते रहेंगे - लोक सेतिया "तनहा"

सितम रोज़ दुनिया के सहते रहेंगे ,
नहीं पर शिकायत कभी कर सकेंगे।

तेरा शहर गलियां तेरी छोड़ देंगे ,
नहीं अब कभी आपसे हम मिलेंगे।

कहें और क्या हम यही बस है कहना ,
तुम्हें खुश रखे हम खुदा से कहेंगे।

मिली ज़िंदगी मांगते मौत रहते ,
हैं ज़िन्दा नहीं हम ,न हम मर सकेंगे।

न कोई भी मंज़िल न कोई ठिकाना ,
चले रास्ते जिस तरफ चल पड़ेंगे।

मेरे दिल के टुकड़े हज़ारों ही होंगे ,
किसी दिन तेरा तीर खाकर मरेंगे।

बुझानी हमें प्यास "तनहा" सभी की ,
सभी जाम खाली हुए हम भरेंगे। 

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