Monday, 3 June 2013

ग़ज़ल 2 0 5 ( अब सभी को खबर हो गई ) - लोक सेतिया "तनहा"

अब सभी को खबर हो गई - लोक सेतिया "तनहा"

अब सभी को खबर हो गई ,
बेहयाई हुनर हो गई।

ख़त्म रिश्ते सभी कर लिये ,
बेरुखी इस कदर हो गई।

साथ कोई नहीं जब चला ,
शायरी हमसफ़र हो गई।

आपने ज़ुल्म इतने किये ,
हर ख़ुशी दर बदर हो गई।

कल अचानक मुलाकात इक ,
फिर उसी मोड़ पर हो गई।

आज नीची किसी की नज़र ,
क्यों हमें देखकर हो गई।

और "तनहा" नहीं कुछ हुआ ,
जुस्तजू बेअसर हो गई। 

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