Wednesday, 22 May 2013

ग़ज़ल 2 0 2 ( भुला नफरत सभी की हम मुहब्बत याद रखते हैं )

भुला नफरत सभी की , हम मुहब्बत याद रखते हैं ,
सितम जितने हुए भूले , इनायत याद रखते हैं !
तुन्हें भेजे हज़ारों खत मुहब्बत के कभी हमने ,
नहीं कुछ भेज पाये हम , वही खत याद रखते हैं !
हमेशा पास रखते हैं तेरी तस्वीर को लेकिन ,
ज़माने से छिपाने की हिदायत याद रखते हैं !
मुहब्बत में कभी कोई शरारत की नहीं हमने ,
सताया ख्वाब में आकर शिकायत याद रखते हैं !
बनेंगे एक दिन मोती हमारी आंख के आंसू ,
तेरा दामन इन्हें पौंछे ,ये हसरत याद रखते हैं !
किसी को बेवफ़ा कहना हमें अच्छा नहीं लगता ,
निभाई थी कभी उसने भी उल्फ़त याद रखते हैं !
तुम्हारी पास आने दूर जाने की अदा तनहा ,
वो सारी शोखियां सारी नज़ाकत याद रखते हैं !

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