Saturday, 4 May 2013

ग़ज़ल 2 0 1 ( बहुत ढूंढा जमाने में नहीं तुम सा मिला कोई )

बहुत ढूंढा ज़माने में , नहीं तुम सा मिला कोई ,
तुम्हारे बिन नहीं सुनता , हमारी इल्तिजा कोई !
इबादत छोड़ मत देना ,परेशां हाल हो कर तुम ,
यही रखना भरोसा बस , कहीं होगा ख़ुदा कोई !
हुई वीरान जब महफ़िल , करोगे याद सब उस दिन ,
वही महफ़िल जमाता था ,कहां उठकर गया कोई !
किया करते सभी से बेवफ़ाई जो हमेशा हैं ,
शिकायत क्यों उन्हीं को है , नहीं उनका हुआ कोई !
कभी कह हम नहीं पाये , कभी वो सुन नहीं पाये ,
शुरू कुछ बात जब करते , तभी बस आ गया कोई !
छिपा कर इस जहां से तुम , इन्हें पलकों पे रख लेना ,
तुम्हारे अश्क मोती हैं ,नहीं ये जानता कोई !
खताएं भी हुई होंगी , कई हमसे यहां तनहा ,
सभी इंसान दुनिया में ,नहीं है देवता कोई !

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