Saturday, 4 May 2013

ग़ज़ल 2 0 1 ( बहुत ढूंढा जमाने में नहीं तुम सा मिला कोई ) -लोक सेतिया "तनहा"

 बहुत ढूंढा जमाने में नहीं तुम सा मिला कोई -लोक सेतिया "तनहा"

बहुत ढूंढा ज़माने में , नहीं तुम सा मिला कोई ,
तुम्हारे बिन नहीं सुनता , हमारी इल्तिजा कोई।

इबादत छोड़ मत देना ,परेशां हाल हो कर तुम ,
यही रखना भरोसा बस , कहीं होगा ख़ुदा कोई।

हुई वीरान जब महफ़िल , करोगे याद सब उस दिन ,
वही महफ़िल जमाता था ,कहां उठकर गया कोई।

किया करते सभी से बेवफ़ाई जो हमेशा हैं ,
शिकायत क्यों उन्हीं को है , नहीं उनका हुआ कोई।

कभी कह हम नहीं पाये , कभी वो सुन नहीं पाये ,
शुरू कुछ बात जब करते , तभी बस आ गया कोई।

छिपा कर इस जहां से तुम  इन्हें पलकों पे रख लेना ,
तुम्हारे अश्क मोती हैं ,  नहीं ये जानता कोई।

खताएं भी हुई होंगी , कई हमसे यहां तनहा ,
सभी इंसान दुनिया में , नहीं है देवता कोई। 

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