Thursday, 25 April 2013

ग़ज़ल 1 9 9 ( नहीं मालूम जिसको खुद पता अपना )

नहीं मालूम जिसको खुद पता अपना ,
बना आये उसी को तुम खुदा अपना !
बड़ी बेदर्द दुनिया में हो आये तुम ,
बनाना खुद पड़ेगा रास्ता अपना !
न करना आरज़ू अपना बनाने की ,
यहां कोई किसी का कब हुआ अपना !
तड़पना उम्र भर होगा मुहब्बत में ,
बहुत प्यारा नसीबा लिख दिया अपना !
हमारा वक़्त कुछ अच्छा नहीं यारो ,
चले जाओ सभी दामन छुड़ा अपना !
नहीं आता किसी के वार से बचना ,
ज़माने को लिया दुश्मन बना अपना !
बतायें शर्त से होता है क्या तनहा ,
लगाई शर्त इक दिन सब बिका अपना !

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