Wednesday, 24 April 2013

ग़ज़ल 1 9 2 ( आज हर झूठ को हरा डाला )

आज हर झूठ को हरा डाला ,
आईना सच का जब दिखा डाला !
बन गये कुछ , लगे उछलने हैं ,
आपने आस्मां बता डाला !
आपके सामने बसाया था ,
घर हमारा तभी जला डाला !
धर्म वालो कहो किया क्या है ,
हर किसी को ज़हर पिला डाला !
जिसपे दीवार को चुना इक दिन ,
आज पत्थर वही हटा डाला !
मुस्कुराये लगे हमें कहने ,
आपके प्यार ने मिटा डाला !
आज देखा उदास तनहा को ,
रुख से परदा तभी हटा डाला !

No comments: