Monday, 29 April 2013

आखिरी तम्मना ( नज़्म ) 9 1 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

रात ख़्वाब में मुझसे खुदा ने कहा ,
तुम्हारे लिये है किसी ने मांगी दुआ ,
क्या चाहते हो मांगना सोचकर तुम ,
आज होगी पूरी हर इक इल्तजा !!
मुझसे ताउम्र तुम्हें शिकायत रही ,
आप खुद से रहते हो हमेशा ही खफ़ा ,
इबादत सीखी न आया माला जपना ,
फिर भी कर लो जो भी आरज़ू करनी !!
कहा मैंने पूछा है तो बस यही है कहना ,
ऐसी दुनिया में मुझे नहीं अब और रहना ,
जन्नत चाहिये न कोई दोज़ख ही मुझे ,
बात  है इक ज़रूरी पूरी उसको करना !!
बाद मरने के मुझे इक ऐसा जहां मिले ,
छोटा और बड़ा नहीं कोई भी जहां  हो ,
है कहां ऐसी जगह मुझको वो दिखा दो ,
कोई परस्तार हो , न जहां कोई खुदा हो !!              ( परस्तार :::: उपासक )

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