Friday, 26 April 2013

ग़ज़ल 2 0 0 ( बड़ा ही मुख़्तसर उसका फ़साना है ) - लोक सेतिया "तनहा"

 बड़ा ही मुख़्तसर उसका फ़साना है - लोक सेतिया "तनहा"  

बड़ा ही मुख्तसर उसका फसाना है ,
बना सच का सदा दुश्मन ज़माना है।

इधर सब दर्द हैं ,उस पार सब खुशियां ,
चला जाये जिसे उस पार जाना है।

कंटीली राह पर चलना यहां पड़ता ,
यही सबको मुहब्बत ने बताना है।

गुज़ारी ज़िंदगी ,आया कहां जीना ,
नया क्या है ,वही किस्सा पुराना है।

जिसे जब जब परख देखा ,वही दुश्मन ,
नहीं अब दोस्तों को आज़माना है।

हमें सारी उम्र इक काम करना है ,
अंधेरों को उजालों से मिलाना है।

ये सारा शहर बदला लग रहा तनहा ,
अभी वैसा तुम्हारा आशियाना है।

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